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UP के इन दो जाबांज अफसरों को मिलेगा गैलेंट्री अवॉर्ड, जानें इनके बारे में

गणतंत्र दिवस का दिन हर किसी के लिए बेहद खास होता है। इस दिन जगह-जगह झंडा फहराया जाता है। इसके साथ ही गणतंत्र दिवस पर पुलिसकर्मियों को मिलने वाले अलग-अलग पदकों के लिए नामों का एलान हो गया है। इस दिन उन पुलिसकर्मियों को भी सम्मानित किया जाता है, जो अपने क्षेत्र में कुछ ना कुछ अच्छा करते हैं। इसी क्रम में एक बार फिर से यूपी के दो आईपीएस अफसरों को गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। गैलेंट्री अवॉर्ड भारत सरकार की तरफ से दिया जाने वाला वीरता और बलिदान का पुरस्कार है।

इन दो अफसरों को मिलेगा गैलेंट्री अवॉर्ड

जानकारी के मुताबिक, इस गणतंत्र दिवस उत्तर प्रदेश के दो आईपीएस को गैलेंट्री अवॉर्ड से नवाजा जाएगा। इन अफसरों में सबसे पहला नाम तो स्पेशल डीजी प्रशांत कुमार और दूसरा नाम आईपीएस मंजिल सैनी का है। इस अफसरों का नाम MHA ने जारी किया है। जैसे ही ये लिस्ट जारी हुई है, तो विभाग में खुशी की लहर दौड़ गई।

कौन हैं प्रशांत कुमार

स्पेशल डीजी प्रशांत कुमार को चौथी बार गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। प्रशांत कुमार 1990 बैच के अधिकारी हैं। उनका जन्म बिहार के सीवान में हुआ था। आईपीएस अफसर बनने से पहले प्रशांत कुमार ने एमएससी, एमफिल और एमबीए भी किया था। वर्तमान समय में एडीजी प्रशांत कुमार प्रदेश कानून व्यवस्था की कमान संभाल रहे हैं। आईपीएस प्रशांत कुमार को कई बार राष्ट्रपति पदक और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जा चुका है। प्रदेश के कई जिलों और जोन की कमान संभाल चुके प्रशांत कुमार ने अपराध पर नकेल कसने में काफी सफलता हासिल की है।

कौन हैं आईपीएस मंजिल सैनी

उत्तर प्रदेश की आईपीएस मंजिल सैनी को लेडी सिंघम के तौर पर जाना जाता है। मंजिल सैनी साल 2005 बैच की आईपीएस अफसर हैं। वो लखनऊ और रामपुर की एसएसपी रही है, जहां उन्होंने शानदार काम किया। लखनऊ के एसएसपी का पद संभालने वाली वो पहली महिला अफसर रही है। इसके अलावा उन्होंने इटावा में भी काम किया है। अमित कुमार किडनी रैकेट मामले की जांच में उनकी अहम भूमिका रही है। उनका काम ऐसा रहा है, कि तबादले के बाद भी लोग उन्हें याद करते हैं।

हरदोई: किसान के सिपाही बेटे ने कर दिया कमाल, PCS परीक्षा में हासिल की 20वीं रैंक, बने SDM

वो कहावत है ना कि, कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों…इस कहावत को चरिर्तार्थ किया है यूपी पुलिस के एक सिपाही ने। दरअसल, उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सिपाही ने अपनी मेहनत के दमपर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा (UP PCS) 2023 में 20वीं रैं हासिल की है। उनकी इस सफलता से ना सिर्फ उनके घर बल्कि पूरे विभाग में खुशी की लहर दौड़ गई है। उनकी इस कामयाबी पर उनके साथी और गांव के लोग बेहद खुश हैं. दोस्त, पड़ोसी और रिश्तेदार बधाई दे रहे हैं।

नौकरी के साथ की पढ़ाई

जानकारी के मुताबिक, दीपक सिंह जनपद बाराबंकी के छोटे से गांव सेमराय के रहने वाले हैं इनके पिता अशोक कुमार सिंह किसान हैं और माता गृहणी हैं वह 5 भाई बहनों में दूसरे नंबर पर आते हैं। उन्होंने साल 2018 में यूपी पुलिस भर्ती में कॉन्स्टेबल की नौकरी हासिल की थी और इस वक्त हरदोई जिले में पोस्टेड हैं। भले ही वो सिपाही बन गए थे, लेकिन उनके मन में अफसर बनने का सपना पल रहा था।

वे नौकरी के साथ-साथ प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करते रहे और मेहनत से अपनी किस्मत पलट दी। 2023 में दीपक ने यूपीपीसीएस की परीक्षा में शामिल हुए तो प्री और मेन्स एग्जाम क्लियर करने बाद 12 जनवरी को पीसीएस का इंटरव्यू दिया था। उन्होंने इस पूरे प्रदेश में 20वां स्थान प्राप्त किया है। अब वे डिप्टी कलेक्टर यानी एसडीएम बनेंगे।

बात करें उनकी पर्सनल लाइफ की तो सिपाही के पिता अशोक कुमार किसान हैं और मां कृष्णा गृहिणी हैं। कहीं वह अपने लक्ष्य से भटक ना जाएं इसके लिए दीपक अपने बिस्तर के पास एक व्हाइट बोर्ड रख लिया था, जिस पर ना मिटने वाले मार्कर पेन से एसडीएम लिख लिख लिया था जैसे ही वह सोने जाते तो उन्हें बोर्ड देख कर अपने एसडीएम बनने के लक्ष्य का याद रहता और सुबह उठते ही बोर्ड को देख कर लक्ष्य प्राप्ति में जुट जाते थे।

अफसर दे रहे बधाई

अपने स्ट्रगल के बारे में दीपक ने बताया कि, पुलिस में नौकरी के साथ पीसीएस की पढ़ाई के लिए उन्हें सिर्फ 4 से 5 घंटे ही मिला करते थे, जिसमें वह किराए के 10 बाई 10 के कमरे में रहकर पढ़ाई किया करते थे। इसके साथ ही वो पुलिस लाइन में बनी लाइब्रेरी में भी लाकर जी तोड़ मेहनत से पढ़ाई करते थे। इसी का नतीजा है, कि अब उन्होंने अपनी मंजिल पा ली। अब दीपक सिंह के डिप्टी कलेक्टर बनते ही पुलिस महकमे में खुशी की लहर दौड़ पड़ी हर कर्मचारियों की बधाइयां मिलनी लगीं। जिले भर के बड़े अफसर उन्हें बधाई दे रहे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए आज भी रामलला के गर्भगृह में मौजूद DG स्पेशल और प्रमुख सचिव गृह

आज रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का तीसरा दिन है। ऐसे में कल की तरह आज भी भारी तादाद में लोग रामलला के दर्शन को अयोध्या पहुंच रहे हैं। प्राण प्रतिष्ठा के तीसरे दिन मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर रहे हैं। कल जिस तरह के भीड़ को संभालने के लिए शाम को अफसरों को मंदिर पहुंचना पड़ा था, ठीक उसी तरह से आज सुबह से ही यूपी के प्रमुख सचिव, गृह, संजय प्रसाद और डीजी लॉ एंड ऑर्डर, प्रशांत कुमार मंदिर के ‘गर्भ गृह’ के अंदर मौजूद हैं। उनकी निगरानी में पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं की आवाजाही में काफी अच्छी तरह से नजर रखें हैं।

23 जनवरी को खोला गया दरबार

जानकारी के मुताबिक, 22 जनवरी को अयोध्या के विशाल मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई। जिसके बाद लोगों के लिए मंदिर 23 जनवरी को खोल दिया गया। भगवान श्रीराम के दर्शन को लाखों लोगो का हूजूम पहले ही दिन पहुंच गया था। ऐसे में प्रमुख सचिव, गृह, संजय प्रसाद और डीजी लॉ एंड ऑर्डर, प्रशांत कुमार को जाकार मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालनी पड़ी थी।

आज भी मौजूद हैं अफसर

कल की तरह आज हालात ना बिगड़े, ऐसे में आज सुबह से ही प्रमुख सचिव, गृह, संजय प्रसाद और डीजी लॉ एंड ऑर्डर, प्रशांत कुमार रामलला के गर्भगृह में मौजूद हैं। वो श्रद्धालुओं की व्यवस्थित आवाजाही पर निगरानी रखे हुए हैं। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन के आला अधिकारी मंदिर परिसर में मौजूद हैं। भक्तों को सुचारू दर्शन सुनिश्चित करने के लिए मंदिर परिसर में 8000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।

राम मंदिर में भक्तों की भीड़ देखते हुए कमान संभालने गर्भगृह में पहुंचे DG स्पेशल और प्रमुख सचिव गृह

22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद आज यानि कि 23 जनवरी के दिन ही अयोध्या में भारी भीड़ जमा हो गई है। लोग दूर-दूर से रामलला के दर्शन को अयोध्या पहुंच रहे हैं। ऐसे में पुलिस को हालात संभालने की काफी कोशिश करनी पड़ रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो अयोध्या में अब तक 3 लाख लोग रामलला के दर्शन कर चुके हैं। ऐसे में कानून व्यवस्था को संभालने के लिए यूपी के प्रमुख गृह सचिव संजय प्रसाद और डीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार गर्भ गृह व्यवस्था देख रहे हैं।

गर्भगृह में मौजूद प्रमुख सचिव-गृह और स्पेशल डीजी-लॉ एंड ऑर्डर

जानकारी के मुताबिक, प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद पहली सुबह अयोध्या के राम मंदिर में रामलला भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। ऐसे में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद बड़ी संख्या में भगवान राम भक्त यूपी के अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं को लगातार दर्शन सुनिश्चित कराने के लिए पुलिस और प्रशासन अलर्ट पर है। प्रमुख सचिव-गृह संजय प्रसाद और स्पेशल डीजी-लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार राम मंदिर के गर्भगृह में मौजूद हैं। स्पेशल डीजी खुद हर चीज पर बारीकी से नजर बनाए हैं।

एडीजी ने की अपील

इसी के साथ भक्तों की भीड़ को देखते हुए लखनऊ जोन एडीजी पीयूष मोर्डिया ने कहा कि बड़ी संख्या में भक्त यहां एकत्र हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना हमारा प्राथमिक कर्तव्य है कि किसी भी भक्त को असुविधा न हो। मैं भक्तों से अपील करता हूं कि वे मंदिर परिसर के अंदर मोबाइल फोन का उपयोग न करें। भक्तों से धैर्य रखने की अपील है।

बाराबंकी पुलिस कर चुकी अपील

इससे पहले आज सुबह से ही वहां इतनी भीड़ है, कि पुलिस को हालात संभालना काफी मुश्किल पड़ रहा है। लखनऊ की और से वाहनों की कतार अयोध्या की तरफ जा रही है। ऐसे में आज सुबह ही बाराबंकी पुलिस ने मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ का हवाला देते हुए उन्हें थोड़ा रुक कर जाने को कहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वो अभी अयोध्या ना जाएं।

जानें कौन है IPS बजरंग प्रसाद ? जिनको मिला UP कैडर

वो कहते हैं ना, लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती। इस मुहावरे को चरितार्थ किया है आईपीएस बजरंग प्रसाद ने। आईपीएस बजरंग प्रसाद यादव साल 2022 की सिविल सेवा परीक्षा में 454वीं रैंक हासिल करने वाले अधिकारी हैं। बजरंग प्रसाद अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे लेकिन, जमीन के विवाद में उनके पिता की हत्या हो गई। इसके बाद उन्होंने पिता के कातिल दबंगों से बदला लेने के लिए यूपीएससी परीक्षा पास करने की ठानी और अब उन्हें यूपी कैडर ही मिला है।

पिता की हत्या से हो गए थे निराश

जानकारी के मुताबिक, बजरंग प्रसाद बस्ती जिले के धोबहट गांव के निवासी हैं। उनके पिता किसान थे। मां गांव की प्रधान थीं। उनके पिता का सपना था कि उनका बेटा यूपी पुलिस की वर्दी पहन कर अफसर बनें। ऐसे में यही सपना सच करने के लिए बजरंग इसकी तैयारी में जुट गए। साल 2019 में परीक्षा की तैयारी के लिए वे दिल्ली आ गए। जब उनका परीक्षा का पहला अटेम्पट था, तभी उनके पिता की हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने उन्हें झकझोर कर रख दिया था।

तीसरे प्रयास में मिली सफलता

इस घटना से उबरने के लिए उनके परिवार ही उनका सहारा बना। इसके बार एक बार फिर से बजरंग प्रसाद ने अपने पिता से सपने को पूरा करने की बात ठानी। बजरंग की हिम्मत और मेहनत का नतीजा यह निकला कि 2022 में तीसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करते हुए 454वीं रैंक हासिल की। यूपीएससी पास कर बजरंग प्रसाद ने अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया था। अब उन्हें जब यूपी कैडर ही मिला है तो उनके परिवार में खुशी का माहौल है।

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