अयोध्या में ड्यूटी के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे पुलिसकर्मी, DG कानून व्यवस्था ने जारी किया सख्त आदेश

हर किसी के लिए 22 जनवरी का दिन बेहद खास है। इस दिन अयोध्या के भव्य मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा बड़े ही धूमधाम से की जायेगी। इसके लिए कई दिग्गजों को निमंत्रण भेजा गया है। 22 जनवरी के दिन अयोध्या में भारी तादाद में लोग भी पहुंचेंगे। ऐसे में कानून व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस विभाग के कंधों पर भरी जिम्मेदारी है। इसी जिम्मेदारी के चलते अब उत्तर प्रदेश के डीजी ने वहां तैनात पुलिसकर्मियों को सख्त आदेश जारी किया है। उन्होंने साफ शब्दों में ये कहा है कि अयोध्या में ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करेंगे।

डीजी कानून व्यवस्था ने जारी किया आदेश

जानकारी के मुताबिक, अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था संभालते वक्त किसी पुलिसकर्मी के द्वारा सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक न हो इसको ध्यान में रखते हुए मोबाइल फोन को न रखने के निर्देश दिए गए हैं। दरअसल, 22 जनवरी को अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर पुलिस को चप्पे-चप्पे पर तैनात किया गया है। ऐसे ही कर्मियों को निर्देश दिया गया है कि अनावश्यक तौर पर स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करें। ड्युटी के दौरान बेहद जरूरी काम के लिए फोन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

अफसरों को भी मानना पड़ेगा आदेश

दरअसल, डीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि ज्यादातर यह देखा गया है कि प्रदेश में फील्ड ड्युटी के दौरान ज्यादातर पुलिसकर्मी स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। जिसके कारण उनका ध्यान भटक जाता है और वो एकाग्रता के साथ ड्युटी नहीं कर पाते है। इसी वजह से कई बार न चाहते हुए भी कुछ न कुछ घटित हो जाता है। कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार की ओर जारी पत्र के मुताबिक इसका पालन पुलिस कमिश्नर, एसएसपी व एसपी को भी करना होगा।

हापुड़ SP की बड़ी पहल, पुलिसकर्मियों को दिलवाया CPR प्रशिक्षण… अब अपनी सांसे देकर पुलिसकर्मी बचा सकेंगे दूसरों की जान

जिले की पुलिस अब अपनी सांस देकर दूसरों की जान बचाएगी। पुलिस को सीपीआर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत शुक्रवार को एसपी अभिषेक वर्मा ने मेरठ रोड पुलिस लाइन में की। वहां जिले के सभी थानों के प्रभारियों और पुलिसकर्मियों को डॉक्टरों ने बताया कि इमरजेंसी में घायल या पीड़ित को कैसे अपनी सांस देकर उसकी जिंदगी बचानी है। पुलिस के महिला-पुरुष जवान लोगों को सीपीआर देकर जान बचाएंगे।

पुलिसकर्मी ऐसे करेंगे मदद 
अक्सर आपने देखा होगा कि सीपीआर देने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं। अब प्रक्रिया को कंपलसरी कर दिया गया है। पुलिस को डॉक्टर बकायादा प्रशिक्षण दे रहे हैं। इमरजेंसी में पुलिस के जवान लोगों की जान बचा सकेंगे। प्रशिक्षण के दौरान सीपीआर या कृत्रिम श्वसन की जानकारी देते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि कई बार व्यक्ति की अचानक सांस रुक जाती है या फिर कार्डिएक अरेस्ट की स्थिति में सांस नहीं आती है। इस अवस्था में सीपीआर देकर लोगों की जान बचाई जा सकती है।

जवान बचाएंगे दूसरों की जान
सीपीआर के जरिए बेहोश व्यक्ति को सांस देने से फेंफड़ों को ऑक्सीजन मिलती है। इससे शरीर में पहले से मौजूद ऑक्सीजन वाला खून संचारित होने लगता है। सीएचसी के डॉक्टर प्रवीण गुप्ता की टीम ने पुलिसकर्मियों को सीपीआर प्रशिक्षण दिया। डॉक्टर प्रवीण गुप्ता ने बताया कि सीपीआर कोई दवा या इंजेक्शन नहीं है। यह एक तरह की प्रक्रिया है, इसका इस्तेमाल मरीज के शरीर पर किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में व्यक्ति की सांस रुक जाने पर सांस वापस लाने तक या दिल की धड़कन सामान्य होने तक छाती को दबाया जाता है। इससे शरीर में पहले से मौजूद खून संचारित होने लगता है और व्यक्ति के साथ कोई अनहोनी नहीं होती है।

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अपनी जाति वाले सिपाहियों पर नहीं लेते एक्शन….आरोपों पर ADCP लखन सिंह का बयान

कानपुर पुलिस विभाग में इन दिनों एक लेटर की चर्चा है. सोशल मीडिया पर ये लेटर वायरल हो रहा है. जो हाइवे किनारे एक धर्म कांटा पर चस्पा किया गया था. लेटर किसी सिपाही द्वारा लिखा बताया जा रहा है. इसमें एडीसीपी (अपर पुलिस उपायुक्त) लखन सिंह यादव पर जातिवादी होने के आरोप लगाए हैं. हालांकि, एडीसीपी ने इसे महकमे को बदनाम करने की साजिश बताया है.

लेटर के जरिए एडीसीपी लखन सिंह यादव के ऊपर अपनी जाति के लोगों की तरफदारी करने का आरोप लगाया गया है. इसमें लिखा है कि एडीसीपी अपनी जाति के लोगों को सपोर्ट करते हैं. अगर उनकी जाति का सिपाही उनके पास किसी काम से जाता है तो वह उससे ढंग से मिलते हैं. बाकी लोगों से अभद्रता करते हैं.

कंप्लेंट मिलने पर अपनी जाति के सिपाहियों को वक्त देते हैं, जबकि दूसरी जाति के सिपाहियों पर तत्काल एक्शन ले लेते हैं. यही काम वसूली की शिकायत मिलने पर आरोपी सिपाहियों के साथ किया था. उन्होंने अपनी जाति के आरोपी सिपाही को छोड़ दिया था. जांच के नाम पर खानापूर्ति की गई.

एडीसीपी ने इस पूरे मामले में क्या कहा?

बता दें कि लखन सिंह यादव कानपुर ईस्ट के एडीसीपी हैं. साथ ही 112 कंट्रोल रूम के भी प्रभारी हैं. इस मामले पर उनका कहना है कि 112 कंट्रोल रूम का प्रभारी बनने के बाद हाइवे पर वसूली की शिकायत मिलने पर कई पुलिसकर्मियों पर एक्शन लिया है.

पिछले दिनों भी शिकायत मिलने पर कई पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है. यह उन्हीं में से किसी की शरारत लगती है. जहां पर लेटर चस्पा मिला है वहां पर कोई सीसीटीवी नहीं है. फिर भी इस मामले की हम जांच कर रहे हैं. पुलिस विभाग में अनुशासन होता है.  किसी को कोई शिकायत है तो सीनियर के पास जा सकता है.

बकौल लखन सिंह- इस तरह की भाषा लिखकर पुलिस विभाग को बदनाम करना, अधिकारियों को बदनाम करना, यह गलत है. मेरे ऊपर जो जातिवाद के आरोप अब लगाए गए हैं ऐसा अभी तक किसी ने कहा नहीं. कानपुर में मेरे ऊपर डिप्टी जॉइंट कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर भी हैं. अगर किसी को कोई शिकायत हो है उनसे मेरी शिकायत कर सकता है. फिलहाल, इस मामले की जांच कराई जा रही है. जिसका भी यह काम होगा उसपर कार्रवाई की जाएगी.

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