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कासगंज SP के दफ्तर में रोते हुए पहुंची दारोगा की पत्नी, खोल दी अपने पति की पोल
यूपी के कासगंज एसपी के दफ्तर में उस वक्त हंगामा मच गया, जब एक दारोगा की पत्नी रोते हुए वहां पहुंची। इस दौरान पीड़िता ने एक ऐसा सच बताया जिसे सुनकर सभी हैरान रह गए। दरअसल, पीड़िता ने बताया कि वो दरोगा की पत्नी है। दरोगा ने पहली पत्नी को तलाक दिए बिना ही उससे मंदिर में शादी की। पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद मामले की जांच सीओ को सौंपी गई है। अफसरों का कहना है कि यदि दारोगा सच में दोषी पाया जाएगा, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
झूठ बोलकर की शादी
जानकारी के मुताबिक, आगरा के लोहामंडी इलाके की रहने वाली महिला प्रियंका ने एसपी ऑफिस पहुंचकर दरोगा की धोखाधड़ी की व्यथा सुनाई। एसपी के सामने रोते हुए महिला ने कहा कि उसने वर्ष 2020 में 26 नवंबर को हिंदू रीति रिवाज से मथुरा के एक मंदिर में दरोगा विक्रम सिंह से शादी की। महिला का कहना है कि दरोगा विक्रम सिंह ने पहली पत्नी के साथ होने की कोई बात नहीं बताई।
मंदिर में शादी करते वक्त दारोगा ने उससे ये कहा था कि, उसकी पहली पत्नी के कोई संतान नहीं है, जिसकी वजह से पहली पत्नी को तलाक दे दिया है। इसी के बाद महिला दारोगा के साथ शादी करके रहने लगी। अब उनके पास दो साल का एक बेटा भी है, लेकिन अब दरोगा विक्रम सिंह पहली पत्नी के साथ रह रहा है और उसे अपने साथ नहीं रख रहा। इसके साथ ही जब पीड़िता इस बात का विरोध करती है दो दारोगा उसे धमकी देता है। ऐसे में अब पीड़िता ने न्याय ना मिलने पर आत्महत्या करने की धमकी दी है।
दारोगा ने की दो शादी
मामले की जानकारी देते हुए जिले की एसपी अपर्णा रजत कौशिक ने बताया कि दरोगा के खिलाफ महिला ने शिकायत की है। दरोगा ने दो शादी की हैं। महिला के आरोपों और साक्ष्यों की जांच करने की जिम्मेदारी सहावर सीओ शाहिदानसरीन को सौंपी गई है। अगर दारोगा दोषी पाया गया तो निश्चित ही उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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आपने अक्सर ये सुना होगा, कि कहीं लड़ाई हो गई, और मामला सुलझाने के लिए…
UP के 21 ट्रेनी IPS अफसरो को मिली अयोध्या में तैनाती, इन्हें होगा कई भाषाओं का ज्ञान
21 Trainee IPS officers posted in Ayodhya who knows many language
अयोध्या में बन रहे विशाल राम मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी, 2024 को होगा। इस खास दिन देश भर के 7,000 से ज़्यादा दिग्गज मेहमान और हजारों आम लोग कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अयोध्या पधारेंगे। ऐसे में जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यूपी पुलिस ने भी अपनी कमर कस ली है। दरअसल, ऐसा अंदेशा लगाया जा रहा है कि, रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान अन्य राज्यों से भी लोग वहां पहुंचेगे। ऐसे में देशभर से आने वाले यात्रियों को भाषा की दिक्कत ना हो, इसके लिए अलग-अलग भाषा बोलने और समझने वाले 21 ट्रेनी IPS अफसरों की भी तैनाती की गई है। इसके साथ ही कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी वहां सादे कपड़ों में पुलिस तैनात की जाएगी।
21 ट्रेनी अफसरों की हुई तैनाती
जानकारी के मुताबिक, जिस प्रकार से साल 2019 के कुम्भ मेले में स्मार्ट पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था, ठीक उसी तर्ज पर अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं को कोई असुविधा ना हो इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने कई कदम उठाए हैं। इसके अंतर्गत अलग-अलग राज्यों से आने वाले भक्तों को देखते हुए अलग-अलग भाषा बोलने वाले ट्रेनी आईपीएस अफसरों की भी तैनाती की गई है। ताकि बाहर से आने वाले भक्तों को लगे कि यूपी की पुलिस अपने व्यवहार से जनता का दिल जीतती है। इसके अलावा अयोध्या में नगर निगम द्वारा बहु भाषी पोस्टर बैनर लगाये गये है ताकि बाहर से आने वाले भक्तों को समझने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
पुलिस विभाग के अफसरों का मानना है कि, प्राण प्रतिष्ठा समारोह यात्रियों के साथ-साथ वहां तैनात पुलिस के लिए भी ऐतिहासिक पल होगा। इसी के चलते प्रमुख स्थलों पर बिना वर्दी और शस्त्रों के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है। ताकि, यात्री सहजता से जरूरत पड़ने पर उनके सामने अपनी बात रख सकें।
11 हजार से ज्यादा जवान रहेंगे तैनात
इसके साथ ही प्राण प्रतिष्ठा समारोह में पुलिस के 11,000 से अधिक जवानों को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए तैनात किया जा रहा है। वहीं अयोध्या में रिजर्व पीएसी की 16 कंपनी तैनात की जा रही हैं। अयोध्या जाने वाले सभी रास्तों को ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित कर वहां सुरक्षा मुहैया करवाई गई है। पुलिस विभार हर उस कोशिश में लगा है कि प्राण प्रतिष्ठा के दौरान किसी तरह की कोई गड़बड़ी ना होने पाए।
चौकी इंचार्ज की कैप पहनकर युवक ने बनाई रील, गाजियाबाद पुलिस ने किया गिरफ्तार
यूपी पुलिस की वर्दी की अपनी अलग अहमियत है। जब कोई इस वर्दी से खिलवाड़ करता है, तो विभाग उसे सजा अवश्य देता है। मामला गाजियाबाद जिले का है, जहां एक युवक ने चौकी इंचार्ज की टोपी के साथ खिलवाड़ किया। दरअसल, उसने चौकी इंचार्ज की टोपी के साथ एक रील बनाई और उसे सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। वीडियो वायरल होते ही मामले का संज्ञान पुलिस ने लिया। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से युवक को गिरफ्तार कर लिया।
ये है मामला
गाजियाबाद के लोनी थाना क्षेत्र स्थित रूपनगर चौकी में आए युवक ने इंस्पेक्टर की टोपी लगाकर इंस्टाग्राम रील बनाई और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई, वैसे ही लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने इस वीडियो का संज्ञान लेते हुए युवक को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने किया गिरफ्तार
जानकारी देते हुए एसीपी लोनी सूर्यबली मौर्य ने बताया कि आरोपी की पहचान लोनी कोतवाली क्षेत्र स्थित प्रकाश विहार कॉलोनी निवासी नितिन सागर के रूप में हुई है। आरोपी युवक रूप नगर चौकी के अंदर गया था। इस दौरान उसने सोशल मीडिया के लिए चौकी इंचार्ज की टोपी लगाकर रील बनाई थी, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल उसे गिरफ्तार कर लिया।
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यूपी पुलिस की वर्दी की अपनी अलग अहमियत है। जब कोई इस वर्दी से खिलवाड़…
एक बार फिर UP Police को है 31 जनवरी का इंतजार, क्या इस बार विभाग को मिलेगा स्थाई मुखिया ?
उत्तर प्रदेश पुलिस लंबे समय से एक ऐसे अफसर का इंतजार कर रही है, जो पुलिस विभाग की कमान को लंबे समय के लिए संभाल सके, लेकिन अभी तक इस मामले में राज्य सरकार की तमन्ना पूरी नहीं हुई। दरअसल, वर्तमान समय में 1988 बैच के IPS विजय कुमार यूपी का कार्यवाहक डीजीपी के पद की कमान संभाल रहे हैं लेकिन अब खबर आ रही है कि 31 जनवरी को विजय कुमार का रिटायरमेंट है, ऐसे में एक बार फिर ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या एक बार फिर से यूपी पुलिस विभाग की कमान एक कार्यवाहक डीजीपी के हाथ में जाएगी, या फिर इस बार शायद विभाग को परमानेंट डीजीपी मिल जाए।
पास आ रहा रिटायरमेंट का दिन
जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पिछले डेढ़ साल से पुलिस मुखिया की कुर्सी कार्यवाहक के भरोसे है। मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी विजय कुमार का 31 जनवरी को रिटायरमेंट है। अब जब उनके रिटायरमेंट के दिन पास आ गए हैं। इसके बाद भी इस बार भी तस्वीर साफ नहीं है कि प्रदेश को स्थायी डीजीपी मिलेगा या कार्यवाहक से ही काम चलाया जाएगा।
बात की जाए सीनियरिटी की तो प्रदेश में वर्तमान समय में सबसे सीनियर आईपीएस ऑफिसर मुकुल गोयल है जो पूर्व में डीजीपी रह चुके हैं। उन्हें किसी कारणवश पद से अचानक से हटा दिया गया था उनके बाद सेकंड सीनियर आईपीएस ऑफिसर आनंद कुमार है जिनका कार्यकाल अप्रैल 2024 तक है ऐसे में उनको भी स्थाई डीजीपी बनाना मुश्किल सा दिखता नजर आ रहा है।
इनको बनाया जा सकता है अस्थाई डीजीपी
अगर 31 जनवरी तक नए डीजीपी का नाम साफ नहीं हुआ तो एक बार फिर से अस्थाई तौर पर डीजी प्रशांत कुमार को ही प्रदेश पुलिस की कमान सौंपी जाएगी। पिछली बार भी ऐसा देखने को मिला था। फिलहाल अभी किसी मामले में कुछ कहा नहीं जा सकता। अब बस इंतजार है तो इसका कि 31 जनवरी से पहले नए डीजीपी का नाम सामने आ जाए।
UP में हाईटेक पुलिस के नाम से मशहूर Noida Police को महीनों से नहीं मिल पा रहा रवि काना….
भले ही यूपी की नोएडा पुलिस कितनी ही तेजतर्रार है और बहुत ही फुर्ती के साथ काम करती है। इसके बावजूद आज के समय में एक बदमाश, जो युवती के साथ गैंगरेप का मुख्य आरोपी भी है, वो बीते कई महीनों से पुलिस की गिरफ्त से फरार है। पुलिस लाख कोशिशों के बाजवूद उसे पकड़ नहीं पा रही। हम बात कर रहे हैं, स्क्रैप माफिया और सरिया तस्करी करने वाले रवि काना की, जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर 19 जुलाई 2023 को एक युवती के साथ दुष्कर्म किया था। इस वारदात के बाद से वो फरार चल रहा है। अब तक रवि काना और उसके साथियों की करीब 260 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी को नोएडा पुलिस के द्वारा जब्त किया गया है, लेकिन अभी तक उसका पता नहीं लग पाया है। उसकी गिरफ्तारी के मामले में अभी तक पुलिस के हाथ खाली ही हैं।
कौन है रवि काना
सबसे पहले आपको बताते हैं कि आखिर रवि काना है कौन ? दरअसल, रवि काना हरेंद्र प्रधान दादुपुर का छोटा भाई है। हरेंद्र प्रधान की हत्या वर्ष 2015 में सुंदर भाटी ने कार्रवाई थी। हरेंद्र की हत्या होने के बाद स्क्रैप और सरिया तस्करी का सारा काम रवि काना ने संभाल लिया। हरेंद्र की मौत के बाद रवि काना ने पुलिस से सुरक्षा की मांग की, जिसके बाद सरकार ने रवि काना को पुलिस सुरक्षा दी।
सुरक्षा मिलने के बाद रवि ने इसका दुरुपयोग किया। रवि काना ने स्क्रैप माफिया और तस्करी के लिए पुलिस सुरक्षा का इस्तेमाल किया था। हालांकि, करीब 6 महीने पहले रवि काना की पुलिस सुरक्षा हटा ली गई। इसके बाद भी रवि काना की हरकतों ने सुधरने का नाम नहीं लिया।
कई महीनों से है फरार
बीती 19 जुलाई 2023 को स्क्रैप माफिया और सरिया तस्करी करने वाले रवि काना ने अपने 4 साथियों के साथ मिलकर नोएडा में एक युवती के साथ गैंगरेप किया था। गैंगरेप के बाद रवि ने करीब 6 महीने तक युवती को ब्लैकमेल किया। गैंगरेप मामले में रवि काना अभी फरार है लेकिन पुलिस इस मामले में सात आरोपियों को जेल भेज चुकी है। इसके साथ ही उसकी पत्नी मधु, सेक्रेटरी कविता झा समेत नौ आरोपी फरार हैं। इतने महीने बीतने के बावजूद पुलिस रवि काना को पकड़ने में असफल है। ऐसे में पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठना भी लाजमी है कि आखिर इतनी हाइटेक होने के बावजूद पुलिस के हाथ अभी तक खाली क्यों हैं ?