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Moradabad: पुलिस लाइन में आपस में ही भिड़े पुलिसकर्मी, जमकर चलाए लात-घूंसे, SSP ने 3 सिपाहियों को किया सस्पेंड
आपने अक्सर ये सुना होगा, कि कहीं लड़ाई हो गई, और मामला सुलझाने के लिए…
UP के 21 ट्रेनी IPS अफसरो को मिली अयोध्या में तैनाती, इन्हें होगा कई भाषाओं का ज्ञान
21 Trainee IPS officers posted in Ayodhya who knows many language
अयोध्या में बन रहे विशाल राम मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी, 2024 को होगा। इस खास दिन देश भर के 7,000 से ज़्यादा दिग्गज मेहमान और हजारों आम लोग कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अयोध्या पधारेंगे। ऐसे में जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यूपी पुलिस ने भी अपनी कमर कस ली है। दरअसल, ऐसा अंदेशा लगाया जा रहा है कि, रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान अन्य राज्यों से भी लोग वहां पहुंचेगे। ऐसे में देशभर से आने वाले यात्रियों को भाषा की दिक्कत ना हो, इसके लिए अलग-अलग भाषा बोलने और समझने वाले 21 ट्रेनी IPS अफसरों की भी तैनाती की गई है। इसके साथ ही कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी वहां सादे कपड़ों में पुलिस तैनात की जाएगी।
21 ट्रेनी अफसरों की हुई तैनाती
जानकारी के मुताबिक, जिस प्रकार से साल 2019 के कुम्भ मेले में स्मार्ट पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था, ठीक उसी तर्ज पर अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं को कोई असुविधा ना हो इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने कई कदम उठाए हैं। इसके अंतर्गत अलग-अलग राज्यों से आने वाले भक्तों को देखते हुए अलग-अलग भाषा बोलने वाले ट्रेनी आईपीएस अफसरों की भी तैनाती की गई है। ताकि बाहर से आने वाले भक्तों को लगे कि यूपी की पुलिस अपने व्यवहार से जनता का दिल जीतती है। इसके अलावा अयोध्या में नगर निगम द्वारा बहु भाषी पोस्टर बैनर लगाये गये है ताकि बाहर से आने वाले भक्तों को समझने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
पुलिस विभाग के अफसरों का मानना है कि, प्राण प्रतिष्ठा समारोह यात्रियों के साथ-साथ वहां तैनात पुलिस के लिए भी ऐतिहासिक पल होगा। इसी के चलते प्रमुख स्थलों पर बिना वर्दी और शस्त्रों के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है। ताकि, यात्री सहजता से जरूरत पड़ने पर उनके सामने अपनी बात रख सकें।
11 हजार से ज्यादा जवान रहेंगे तैनात
इसके साथ ही प्राण प्रतिष्ठा समारोह में पुलिस के 11,000 से अधिक जवानों को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए तैनात किया जा रहा है। वहीं अयोध्या में रिजर्व पीएसी की 16 कंपनी तैनात की जा रही हैं। अयोध्या जाने वाले सभी रास्तों को ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित कर वहां सुरक्षा मुहैया करवाई गई है। पुलिस विभार हर उस कोशिश में लगा है कि प्राण प्रतिष्ठा के दौरान किसी तरह की कोई गड़बड़ी ना होने पाए।
जानें कौन है IPS बजरंग प्रसाद ? जिनको मिला UP कैडर
वो कहते हैं ना, लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती। इस मुहावरे को चरितार्थ किया है आईपीएस बजरंग प्रसाद ने। आईपीएस बजरंग प्रसाद यादव साल 2022 की सिविल सेवा परीक्षा में 454वीं रैंक हासिल करने वाले अधिकारी हैं। बजरंग प्रसाद अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे लेकिन, जमीन के विवाद में उनके पिता की हत्या हो गई। इसके बाद उन्होंने पिता के कातिल दबंगों से बदला लेने के लिए यूपीएससी परीक्षा पास करने की ठानी और अब उन्हें यूपी कैडर ही मिला है।
पिता की हत्या से हो गए थे निराश
जानकारी के मुताबिक, बजरंग प्रसाद बस्ती जिले के धोबहट गांव के निवासी हैं। उनके पिता किसान थे। मां गांव की प्रधान थीं। उनके पिता का सपना था कि उनका बेटा यूपी पुलिस की वर्दी पहन कर अफसर बनें। ऐसे में यही सपना सच करने के लिए बजरंग इसकी तैयारी में जुट गए। साल 2019 में परीक्षा की तैयारी के लिए वे दिल्ली आ गए। जब उनका परीक्षा का पहला अटेम्पट था, तभी उनके पिता की हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने उन्हें झकझोर कर रख दिया था।
तीसरे प्रयास में मिली सफलता
इस घटना से उबरने के लिए उनके परिवार ही उनका सहारा बना। इसके बार एक बार फिर से बजरंग प्रसाद ने अपने पिता से सपने को पूरा करने की बात ठानी। बजरंग की हिम्मत और मेहनत का नतीजा यह निकला कि 2022 में तीसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करते हुए 454वीं रैंक हासिल की। यूपीएससी पास कर बजरंग प्रसाद ने अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया था। अब उन्हें जब यूपी कैडर ही मिला है तो उनके परिवार में खुशी का माहौल है।
चौकी इंचार्ज की कैप पहनकर युवक ने बनाई रील, गाजियाबाद पुलिस ने किया गिरफ्तार
यूपी पुलिस की वर्दी की अपनी अलग अहमियत है। जब कोई इस वर्दी से खिलवाड़ करता है, तो विभाग उसे सजा अवश्य देता है। मामला गाजियाबाद जिले का है, जहां एक युवक ने चौकी इंचार्ज की टोपी के साथ खिलवाड़ किया। दरअसल, उसने चौकी इंचार्ज की टोपी के साथ एक रील बनाई और उसे सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। वीडियो वायरल होते ही मामले का संज्ञान पुलिस ने लिया। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से युवक को गिरफ्तार कर लिया।
ये है मामला
गाजियाबाद के लोनी थाना क्षेत्र स्थित रूपनगर चौकी में आए युवक ने इंस्पेक्टर की टोपी लगाकर इंस्टाग्राम रील बनाई और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई, वैसे ही लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने इस वीडियो का संज्ञान लेते हुए युवक को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने किया गिरफ्तार
जानकारी देते हुए एसीपी लोनी सूर्यबली मौर्य ने बताया कि आरोपी की पहचान लोनी कोतवाली क्षेत्र स्थित प्रकाश विहार कॉलोनी निवासी नितिन सागर के रूप में हुई है। आरोपी युवक रूप नगर चौकी के अंदर गया था। इस दौरान उसने सोशल मीडिया के लिए चौकी इंचार्ज की टोपी लगाकर रील बनाई थी, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल उसे गिरफ्तार कर लिया।
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एक बार फिर UP Police को है 31 जनवरी का इंतजार, क्या इस बार विभाग को मिलेगा स्थाई मुखिया ?
उत्तर प्रदेश पुलिस लंबे समय से एक ऐसे अफसर का इंतजार कर रही है, जो पुलिस विभाग की कमान को लंबे समय के लिए संभाल सके, लेकिन अभी तक इस मामले में राज्य सरकार की तमन्ना पूरी नहीं हुई। दरअसल, वर्तमान समय में 1988 बैच के IPS विजय कुमार यूपी का कार्यवाहक डीजीपी के पद की कमान संभाल रहे हैं लेकिन अब खबर आ रही है कि 31 जनवरी को विजय कुमार का रिटायरमेंट है, ऐसे में एक बार फिर ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या एक बार फिर से यूपी पुलिस विभाग की कमान एक कार्यवाहक डीजीपी के हाथ में जाएगी, या फिर इस बार शायद विभाग को परमानेंट डीजीपी मिल जाए।
पास आ रहा रिटायरमेंट का दिन
जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पिछले डेढ़ साल से पुलिस मुखिया की कुर्सी कार्यवाहक के भरोसे है। मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी विजय कुमार का 31 जनवरी को रिटायरमेंट है। अब जब उनके रिटायरमेंट के दिन पास आ गए हैं। इसके बाद भी इस बार भी तस्वीर साफ नहीं है कि प्रदेश को स्थायी डीजीपी मिलेगा या कार्यवाहक से ही काम चलाया जाएगा।
बात की जाए सीनियरिटी की तो प्रदेश में वर्तमान समय में सबसे सीनियर आईपीएस ऑफिसर मुकुल गोयल है जो पूर्व में डीजीपी रह चुके हैं। उन्हें किसी कारणवश पद से अचानक से हटा दिया गया था उनके बाद सेकंड सीनियर आईपीएस ऑफिसर आनंद कुमार है जिनका कार्यकाल अप्रैल 2024 तक है ऐसे में उनको भी स्थाई डीजीपी बनाना मुश्किल सा दिखता नजर आ रहा है।
इनको बनाया जा सकता है अस्थाई डीजीपी
अगर 31 जनवरी तक नए डीजीपी का नाम साफ नहीं हुआ तो एक बार फिर से अस्थाई तौर पर डीजी प्रशांत कुमार को ही प्रदेश पुलिस की कमान सौंपी जाएगी। पिछली बार भी ऐसा देखने को मिला था। फिलहाल अभी किसी मामले में कुछ कहा नहीं जा सकता। अब बस इंतजार है तो इसका कि 31 जनवरी से पहले नए डीजीपी का नाम सामने आ जाए।
UP में हाईटेक पुलिस के नाम से मशहूर Noida Police को महीनों से नहीं मिल पा रहा रवि काना….
भले ही यूपी की नोएडा पुलिस कितनी ही तेजतर्रार है और बहुत ही फुर्ती के साथ काम करती है। इसके बावजूद आज के समय में एक बदमाश, जो युवती के साथ गैंगरेप का मुख्य आरोपी भी है, वो बीते कई महीनों से पुलिस की गिरफ्त से फरार है। पुलिस लाख कोशिशों के बाजवूद उसे पकड़ नहीं पा रही। हम बात कर रहे हैं, स्क्रैप माफिया और सरिया तस्करी करने वाले रवि काना की, जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर 19 जुलाई 2023 को एक युवती के साथ दुष्कर्म किया था। इस वारदात के बाद से वो फरार चल रहा है। अब तक रवि काना और उसके साथियों की करीब 260 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी को नोएडा पुलिस के द्वारा जब्त किया गया है, लेकिन अभी तक उसका पता नहीं लग पाया है। उसकी गिरफ्तारी के मामले में अभी तक पुलिस के हाथ खाली ही हैं।
कौन है रवि काना
सबसे पहले आपको बताते हैं कि आखिर रवि काना है कौन ? दरअसल, रवि काना हरेंद्र प्रधान दादुपुर का छोटा भाई है। हरेंद्र प्रधान की हत्या वर्ष 2015 में सुंदर भाटी ने कार्रवाई थी। हरेंद्र की हत्या होने के बाद स्क्रैप और सरिया तस्करी का सारा काम रवि काना ने संभाल लिया। हरेंद्र की मौत के बाद रवि काना ने पुलिस से सुरक्षा की मांग की, जिसके बाद सरकार ने रवि काना को पुलिस सुरक्षा दी।
सुरक्षा मिलने के बाद रवि ने इसका दुरुपयोग किया। रवि काना ने स्क्रैप माफिया और तस्करी के लिए पुलिस सुरक्षा का इस्तेमाल किया था। हालांकि, करीब 6 महीने पहले रवि काना की पुलिस सुरक्षा हटा ली गई। इसके बाद भी रवि काना की हरकतों ने सुधरने का नाम नहीं लिया।
कई महीनों से है फरार
बीती 19 जुलाई 2023 को स्क्रैप माफिया और सरिया तस्करी करने वाले रवि काना ने अपने 4 साथियों के साथ मिलकर नोएडा में एक युवती के साथ गैंगरेप किया था। गैंगरेप के बाद रवि ने करीब 6 महीने तक युवती को ब्लैकमेल किया। गैंगरेप मामले में रवि काना अभी फरार है लेकिन पुलिस इस मामले में सात आरोपियों को जेल भेज चुकी है। इसके साथ ही उसकी पत्नी मधु, सेक्रेटरी कविता झा समेत नौ आरोपी फरार हैं। इतने महीने बीतने के बावजूद पुलिस रवि काना को पकड़ने में असफल है। ऐसे में पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठना भी लाजमी है कि आखिर इतनी हाइटेक होने के बावजूद पुलिस के हाथ अभी तक खाली क्यों हैं ?
तो क्या अब पक जाएगी साहब की खिचड़ी?
यूपी में कुछ समय पहले एक खबर चल रही थी, कि एक बड़े अफसर, जो रिटायर हो गए हैं, उन्हें राज्य सुरक्षा सलाहकार (State Security Advisor) बनाया जा सकता है। हालांकि राज्य में इस तरह का कोई पद नहीं है लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की तर्ज पर राज्य सुरक्षा सलाहकार का पद सृजित किए जाने की बातें चलने लगीं थीं। काफी कोशिशों के बावजूद इस पद का सृजन हो नहीं पाया। अब इस बार जब मकर संक्रांति के दिन उन बड़े अफसर की मुलाकात प्रदेश के मुखिया से हुई तो एक बार फिर से ये खबर उड़ने लगी है, कि उन्हें जल्द ही कोई बड़ा पद मिल सकता है।
काफी समय से कर रहे प्रयास
जानकारी के मुताबिक, कुछ समय पहले यूपी में एक ऐसे अफसर तैनात थे, जिन्हें सीएम योगी का काफी करीबी माना जा रहा था। खबर थी कि अगर केंद्र सरकार उन्हें एक्सटेंशन नहीं देती है तो उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की तर्ज पर राज्य सुरक्षा सलाहकार बनाया जाएगा। उनकी गिनती सीएम योगी के नजदीकी अफसरों में होती थी। यही वजह है उनके कौशल का इस्तेमाल करने के लिए राज्य सुरक्षा सलाहकार का पद सृजित करने की चर्चा चलने लगी थी।
अब पक सकती है खिचड़ी
समय बीता और साहब रिटायर हो गए। इसके बाद वो लगातार लगातार सीएम से मुलाकात का मौका तलाश रहे थे, लेकिन कुछ फायदा नहीं मिला। इसके बाद नए साल की शुरुआत में 15 जनवरी के दिन साहब की मुलाकात प्रदेश के मुखिया से हो गई। अब खबर है कि वो मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए प्रयास कर रहे हैं। इस मुलाकात के बाद अब खबर उड़ रही है, कि खिचड़ी पर साहब की सीएम से मुलाकात तो हो गई है, पर पता नहीं कि अब उनकी खिचड़ी पकेगी या नहीं।।।