फर्जी ढंग से हथियार का लाइसेंस लेने के मामले में कोर्ट ने माफिया MUKHTAR ANASARI को दिया दोषी करार

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उत्तर प्रदेश के पूर्व बाहुबली विधायक मुख्यार अंसारी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब एक और केस में मुख्तार अंसारी दोषी करार दिए गए हैं. वाराणसी कोर्ट ने फर्जी ढंग से शस्त्र लाइसेंस लेने के मामले में पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी को दोषी करार दिया है. सजा के बिंदु पर कोर्ट बुधवार यानि 13 मार्च को फैसला सुनाएगी. वाराणसी की विशेष न्यायाधीश (MP-MLA) अवनीश गौतम की कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को दोषी करार दिया है.

आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाए गए

बांदा जेल से पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विशेष न्यायाधीश (MP-MLA) अवनीश गौतम की कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्तार अंसारी आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाए गए. मुख्तार अंसारी की सजा के बिंदु पर बुधवार को 12 बजे सुनवाई होगी. भ्रष्टाचार के मामले में मुख्तार अंसारी को दोषमुक्त कर दिया गया. पूर्व बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने 10 जून 1987 को दोनाली बंदूक के लाइसेंस के लिए गाजीपुर के जिला मजिस्ट्रेट के यहां प्रार्थना पत्र दिया था. मुख्तार अंसारी ने गाजीपुर के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के फर्जी हस्ताक्षर से संस्तुति प्राप्त कर शस्त्र लाइसेंस प्राप्त कर लिया था.

1990 में डिप्टी कलेक्टर समेत पांच पर दर्ज हुई थी फिर

फर्जीवाड़ा उजागर होने पर CBCID द्वारा चार दिसंबर 1990 को मुहम्मदाबाद थाने में मुख्तार अंसारी, तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर समेत पांच नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था. जांच के बाद तत्कालीन आयुध लिपिक गौरीशंकर श्रीवास्तव और मुख्तार अंसारी के विरुद्ध 1997 में अदालत में आरोप पत्र प्रेषित किया गया था.

पूर्व DGP और पूर्व मुख्य सचिव भी बने गवाह

इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रदेश के मुख्य सचिव रहे आलोक रंजन और पूर्व DGP देवराज नागर समेत 10 गवाहों का बयान दर्ज किया गया था. अभियुक्त गणों पर आरोप पत्र में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा का भी आरोप होने के कारण उक्त मामले का विचारण विशेष क्षेत्राधिकार प्राप्त न्यायालय वाराणसी में प्रचलित रहा. इसी बीच अश्वनी उपाध्याय बनाम भारत संघ के मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश से उक्त मामला विशेष न्यायालय (MP-MLA) के न्यायालय में विचाराधीन रहा, जिसमें आज निर्णय आया.

इन 10 लोगों का बयान हुआ दर्ज

अशफाक अहमद (CBCID).

आलोक रंजन तत्कालीन जिलाधिकारी गाजीपुर, जो मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन के पद पर भी रहे का बयान 5 जुलाई 22 को दर्ज किया गया.

श्री प्रकाश शास्त्र लिपिक गाजीपुर.

देवराज नागर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक गाजीपुर, जो पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के पद पर भी आसीन रहे का बयान 21 फरवरी 2023 को दर्ज किया गया.

मूलचंद तिवारी विवेचना अधिकारी CBCID.

रामनारायण सिंह विवेचना अधिकारी CBCID
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राम शिरोमणि पांडे विवेचना अधिकारी CBCID.

जगन मैथ्यूज तत्कालीन जिलाधिकारी गाजीपुर.

विश्व भूषण सिंह विवेचना अधिकारी CBCID.

मदन सिंह विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिक.

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