आगरा में पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने शनिवार रात पुलिस विभाग में बड़ी कार्रवाई करते हुए आठ पुलिसकर्मियों पर शिकंजा कसा। कार्य में लापरवाही, भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों और शासन की मंशा के अनुरूप काम नहीं करने के मामलों में दो इंस्पेक्टरों को लाइन हाजिर किया गया, जबकि छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। कार्रवाई एलआईयू की जांच और रिपोर्ट के बाद की गई।
ये है मामला
थाना सदर के प्रभारी निरीक्षक विजय विक्रम सिंह और जगनेर के निरीक्षक सुभाष चंद्र को लाइन हाजिर किया गया है। सदर क्षेत्र के नंद प्लाजा स्थित एक कैफे में बने केबिन में युवक-युवतियों को घंटों के हिसाब से बैठाने की शिकायत के बाद पुलिस ने छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान 16 से अधिक युवक-युवतियां मिले थे। मामले में पांच लोगों को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज की गई थी और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई थीं।
ये हैं पुलिसकर्मी
इस प्रकरण में चौकी प्रभारी की रिपोर्ट पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने और कैफे बंद न कराए जाने को लेकर सवाल उठे थे। एलआईयू की जांच में सदर इंस्पेक्टर और एसीपी राम प्रवेश गुप्ता की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। इसके बाद इंस्पेक्टर विजय विक्रम सिंह के खिलाफ कार्रवाई हुई।
वहीं, जगनेर इंस्पेक्टर सुभाष चंद्र के खिलाफ अवैध परिवहन पर प्रभावी रोक नहीं लगाने समेत कई शिकायतें सामने आई थीं।
निलंबित पुलिसकर्मियों में जगनेर के इंस्पेक्टर अपराध विजेंद्र सिंह, सिपाही अंकित कुमार, डौकी के सिपाही राजीव पाराशर, बमरौली कटारा के हेड कांस्टेबल राशिद अली, किरावली के सिपाही संचित और एसीपी खेरागढ़ कार्यालय के सिपाही धर्मेंद्र सिंह शामिल हैं।