उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से जुड़ी एक अहम प्रशासनिक अपडेट सामने आई है, जहां यूपी पुलिस मुख्यालय ने झूठी एफआईआर और झूठी गवाही को लेकर पहले जारी किए गए सख्त सर्कुलर को फिलहाल वापस ले लिया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद लिया गया है, जिससे इस पूरे मामले की कानूनी दिशा बदल गई है।
14 मार्च को आया आदेश
जानकारी के अनुसार, यूपी पुलिस के डीजीपी राजीव कृष्ण ने 14 मार्च 2026 को एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें यह प्रावधान था कि अगर किसी मामले में एफआईआर को झूठा पाया जाता है, तो शिकायतकर्ता और गवाहों के खिलाफ अदालत में परिवाद दाखिल करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, अगर इस प्रक्रिया में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित विवेचक, थाना प्रभारी और वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘उम्मे फरवा बनाम राज्य सरकार’ मामले में दिए गए ताजा निर्देशों के बाद यह सर्कुलर निरस्त कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुछ निर्देशों पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया है कि मामले के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों पर अगली सुनवाई तक अमल नहीं किया जाएगा।
लिया गया वापस
इसी आधार पर पहले जारी किया गया सर्कुलर लागू किया गया था, लेकिन अब कानूनी स्थिति बदलने के बाद इसे वापस ले लिया गया है। पुलिस मुख्यालय की ओर से साफ किया गया है कि फिलहाल झूठी एफआईआर और झूठी गवाही को लेकर सख्त प्रक्रिया लागू नहीं होगी।
अब आगे की कार्रवाई पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय और निर्देशों पर निर्भर करेगी। इस फैसले के बाद पुलिस प्रशासन और कानूनी विशेषज्ञों के बीच भी इस विषय को लेकर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि यह मामला सीधे न्यायिक प्रक्रिया और पुलिसिंग सिस्टम से जुड़ा हुआ है।