बलरामपुर के ललिया थाने से जुड़ा मामला है। यहां मजदूरी करने वाले अमरजीत सोनकर ने आरोप लगाया कि गांव का एक युवक उसकी पत्नी, तीन छोटे बच्चों और घर में रखे जेवर-नकदी लेकर भाग गया। शिकायत लेकर थाने पहुंचा तो पुलिस ने मदद करने के बजाय उसे ही गाली दी, जातिसूचक टिप्पणी की और पीट दिया।
गायब था समान
अमरजीत का कहना है कि 4 अगस्त को वह काम से लौटा तो घर खाली मिला। पत्नी निर्मला और तीन बच्चे नहीं थे। बक्सा टूटा था और उसमें रखे करीब 8 लाख के गहने और 45 हजार रुपये भी नहीं थे। उसका शक गांव के पंकज लाल उर्फ किन्नू पर है।
पुलिसकर्मियों ने नहीं सुनी शिकायत
8 अगस्त को पुलिस ने पंकज के साथ महिला और बच्चों को बरामद भी कर लिया, लेकिन थाने में थानाध्यक्ष और चौकी प्रभारी ने उसकी शिकायत नहीं सुनी। उल्टा उसे पीटकर पत्नी और बच्चों को उसी आरोपी के साथ भेज दिया गया।
पीड़ित ने 29 अगस्त को SP को चिट्ठी भेजी, कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उसने SC-ST कोर्ट में अर्जी दी।
कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए थानाध्यक्ष, चौकी प्रभारी समेत 9 लोगों के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। जज अवधेश कुमार द्वितीय ने 17 नवंबर को बयान के लिए बुलाया है।