पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में अब फिटनेस का नया मानक तय कर दिया गया है। प्रशिक्षुओं की सहनशक्ति और एरोबिक क्षमता को परखने के लिए अब “यो-यो टेस्ट” को अनिवार्य किया गया है। यह एक वैज्ञानिक तरीका है जिससे यह आकलन किया जा सकेगा कि प्रशिक्षण पा रहे जवान न केवल मानसिक रूप से मजबूत हैं, बल्कि शारीरिक रूप से भी हर स्थिति में तैयार हैं। इस टेस्ट में प्रशिक्षु को 20 मीटर की दूरी पर रखे दो बिंदुओं के बीच लगातार आगे-पीछे दौड़ना होता है। हर राउंड 40 मीटर का होता है और जैसे-जैसे लेवल बढ़ता है, दौड़ की गति और राउंड की संख्या भी बढ़ती जाती है।
23 स्तर में होगा पूरा
यो-यो टेस्ट कुल 23 स्तरों में पूरा होता है। अंतिम लेवल तक पहुंचने के लिए प्रशिक्षु को 182 राउंड यानी 3640 मीटर की दौड़ लगभग 28 मिनट 45 सेकंड में पूरी करनी होती है। हर स्तर के बीच 10 सेकंड का विश्राम दिया जाता है, जबकि शुरुआती चार राउंड को वार्मअप के लिए निर्धारित किया गया है।
5वें राउंड से दौड़ की गति तेज होती जाती है — जहां शुरुआत में एक राउंड 7.20 सेकंड में पूरा करना होता है, वहीं आखिरी स्तर में यह समय घटकर 3.79 सेकंड रह जाता है। यदि कोई प्रशिक्षु निर्धारित समय में राउंड पूरा नहीं कर पाता, तो उसे दो मौके दिए जाते हैं। दो बार असफल होने पर वह टेस्ट से बाहर माना जाएगा।
एएसपी ने दी जानकारी
अकादमी के एएसपी महेंद्र कुमार के अनुसार अब यह टेस्ट हर महीने आयोजित किया जाएगा ताकि प्रत्येक प्रशिक्षु की फिटनेस और प्रगति की निरंतर जांच की जा सके। दो फिटनेस कोच नियुक्त किए गए हैं जो डाइट और स्वास्थ्य पर निगरानी रखेंगे। विभाग इस बात पर भी विचार कर रहा है कि यो-यो टेस्ट के अंक प्रशिक्षण के कुल मूल्यांकन में शामिल किए जाएं ताकि फिटनेस को और अधिक प्राथमिकता दी जा सके।
दिलचस्प बात यह है कि यो-यो टेस्ट की शुरुआत 1990 में डेनमार्क के खेल वैज्ञानिक जेन्स बैंग्सबो ने फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए की थी। बाद में इसे ऑस्ट्रेलिया और भारत के क्रिकेट बोर्ड ने भी अपनाया। अब यूपी पुलिस ने इसे अपने प्रशिक्षण सिस्टम में शामिल कर जवानों की फिटनेस को लेकर एक नया मानक तय किया है।