लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर अब निगाहें 19 मई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस सुनवाई के बाद नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी आएगी। सूत्रों के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) कोर्ट की कार्यवाही के बाद करीब 15 दिनों के भीतर तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को भेज सकता है।
किसका नाम सबसे आगे
इस पैनल में मौजूदा कार्यवाहक DGP राजीव कृष्ण का नाम सबसे मजबूत माना जा रहा है। वे जून 2025 से कार्यवाहक DGP हैं और सरकार के करीबी व सख्त छवि वाले अधिकारी माने जाते हैं। ऐसे में उनके स्थायी DGP बनने की संभावना अधिक जताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही DGP की नियुक्ति UPSC पैनल के जरिए होती है। 19 मई की सुनवाई में इस प्रक्रिया और समयसीमा पर स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने की उम्मीद है, जिससे लंबे समय से लंबित नियुक्ति का रास्ता साफ हो सकता है।
DGP पद की दौड़ में 1990 बैच की IPS रेणुका मिश्रा और 1991 बैच के पीयूष आनंद भी प्रमुख दावेदार हैं। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों और पदस्थ स्थिति को देखते हुए राजीव कृष्ण सबसे आगे नजर आ रहे हैं।
चार वर्षों से नहीं हुई स्थाई नियुक्ति
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पिछले चार वर्षों से स्थायी DGP की नियुक्ति नहीं हो सकी है। मई 2022 के बाद से अब तक पांच कार्यवाहक DGP बदले जा चुके हैं। ऐसे में 19 मई की सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है, जो प्रदेश को स्थायी पुलिस नेतृत्व देने में निर्णायक साबित हो सकती है।