गाजियाबाद/बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें वर्दी की आड़ में अपहरण और फिरौती वसूली का आरोप लगा है। गाजियाबाद पुलिस लाइंस में तैनात हेड कॉन्स्टेबल विनीत कुमार पर आरोप है कि उसने छुट्टी लेकर बुलंदशहर के सिकंदराबाद क्षेत्र में स्थानीय पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर एक व्यक्ति का अपहरण कर लिया।
ये है मामला
जानकारी के अनुसार, 30 अप्रैल को सिकंदराबाद निवासी सलमान को गुलावठी टोल प्लाजा के पास से सादे कपड़ों में आए लोगों ने जबरन उठा लिया। बाद में उसे थाने में अवैध रूप से रखा गया। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसकी रिहाई के बदले पहले 20 लाख रुपये की मांग की, जो बाद में 6 लाख रुपये पर तय हुई। रकम मिलने के बाद ही पीड़ित को छोड़ा गया।
मामले की शिकायत जब डीआईजी मेरठ तक पहुंची तो जांच के आदेश दिए गए। टोल प्लाजा और थाने के सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पुलिस की भूमिका उजागर हो गई। जांच में सामने आया कि इस वारदात में सिकंदराबाद थाने के पुलिसकर्मियों के साथ गाजियाबाद का हेड कॉन्स्टेबल विनीत कुमार भी शामिल था, जो सादे कपड़ों में सक्रिय था।
एसएसपी ने की कार्रवाई
जांच के बाद एसएसपी बुलंदशहर ने सख्त कार्रवाई करते हुए तत्कालीन एसएचओ नीरज मलिक समेत सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। वहीं, आरोपी हेड कॉन्स्टेबल विनीत कुमार फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
पूरे घटनाक्रम में पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठे हैं, क्योंकि जिस व्यक्ति को उठाया गया, वह असली संदिग्ध नहीं था। बताया जा रहा है कि नाम की समानता के चलते पुलिस ने गलत व्यक्ति को पकड़ लिया और बाद में उससे वसूली कर उसे छोड़ दिया।