गाजियाबाद: सड़क हादसे में दो सिपाहियों की मौत, चालक की हालत गंभीर

यूपी के गाजियाबाद जिले में हुए सड़क हादसे में यूपी और दिल्ली के दो सिपाहियों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के वक्त ये गाड़ी डिवाइडर से टकरा गई थी। इसी के चलते ये दर्दनाक हादसा हो गया। हादसे के बाद अन्य पुलिसकर्मी घायल पुलिसकर्मियों को पास के अस्पताल में ले गए, जहां दो सिपाहियों को मृत घोषित कर दिया गया। फिलहाल खबरों की मानें तो गाड़ी चलाने वाला चालक भी घायल है लेकिन उसकी हालत खतरे से बाहर है। मृतक सिपाहियों में से एक के पिता ने इसे हादसा नहीं बल्कि साजिश का नाम दिया है।

ये है मामला

जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस में सिपाही जय ओम शर्मा और उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाही जयवीर सिंह राघव बिल्डर निखिल चौधरी की सुरक्षा में तैनात थे। बीती रात कार में दोनों सिपाही और एक चालक इंदिरापुरम से वसुंधरा के बुद्ध चौक की ओर जा रहे थे। देर रात इनकी कार एलिवेडेट रोड के नीचे कार डिवाइडर से टकरा कर पलटती हुई दूसरी तरफ पहुंच गई।

जैसे ही पास में स्थित पुलिस चौकी पर हादसे की खबर पहुंची तो मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने सिपाहियों को तत्काल ही अस्पताल में भर्ती कराया, जहां दोनों सिपाहियों को मृत घोषित कर दिया गया। फिलहाल अभी चालक भी घायल है।

हो रही है मामले की जांच

हादसे के बाद दोनों सिपाहियों के परिजनों को हादसे की सूचना दे दी गई है। दोनों सिपाहियों का शव हिंडन मोर्चरी पर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। मृतक सिपाही जयवीर सिंह के पिता घनश्याम सिंह का कहना है कि दोनों पुलिसकर्मियों की मौत गले नहीं उतर रही। उनका कहना है कि ये हादसा नहीं बल्कि हत्या है। इसी के चलते अब अफसरों ने मामले में जांच बैठाई है।

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान कड़ी रहेगी सुरक्षा व्यवस्था, चप्पे-चप्पे पर अभी से पुलिस तैनात

22 जनवरी का दिन हर किसी के लिए बेहद खास होने वाला है। दरअसल, इस दिन अयोध्या के में तैयार हो रहे विशाल राममंदिर में रामलला की मूर्ति विराजमान की जाएगी। ऐसे में लोग इस कार्यक्रम के लिए पीएम मोदी से लेकर तमाम दिग्गज नेता और अभिनेता वहां पहुंचेगे। हजारों-लाखों की तादाद में मंदिर में लोगों के पहुंचने की उम्मीद लगाई जा रही है। ऐसे में जिले की सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की जा रही है।

किए गए कड़े इंतेजाम

जानकारी के मुताबिक, अयोध्या में राम लला (शिशु भगवान राम) के प्राण-प्रतिष्ठा (अभिषेक) समारोह के लिए वैदिक अनुष्ठान मुख्य समारोह से एक सप्ताह पहले 16 जनवरी को शुरू होंगे। वाराणसी के एक पुजारी, लक्ष्मी कांत दीक्षित, 22 जनवरी को राम लला के अभिषेक समारोह का मुख्य अनुष्ठान करेंगे। 14 जनवरी से 22 जनवरी तक, अयोध्या में अमृत महोत्सव मनाया जाएगा। इसके लिए जिले में कड़ी सुरक्षा के इंतेजाम किए जा रहे हैं।

हर जगह पर होगी फोर्स तैनात

हाल ही में अयोध्या पुलिस ने आगामी ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह के संबंध में श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के अधिकारियों के साथ एक बैठक की, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई। इसमें ये साफ तौर पर कहा गया कि जिले में अभी से भारी तादाद में पुलिस की तैनाती कर दी गई है और पूरे जिले में राम मंदिर के आसपास के इलाकों और टेंट सिटी में आर्टिफिशिय इंटेलिजेंस से संचालित सीसीटीवी लगाए गए हैं।

पुलिस ने ये भरोसा दिलाया है कि इस भव्य समारोह के लिए शहर आने वाले तीर्थयात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। पुलिस को हर जगह इस तरह से तैनाती की जाएगी कि किसी को भी किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े। इसके लिए अतिरिक्त पुलिसबल को भी तैयार कर दिया गया है।

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अलीगढ़ के नए SSP ने देर रात संभाला कार्यभार, IG से भी की मुलाकात

हाल ही में उत्तर प्रदेश में कई आईपीएस अफसरों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया। इस लिस्ट में कई सीनियर आईपीएस अफसरों के नाम शामिल थे। जिसमे आईपीएस संजीव सुमन का नाम भी शामिल है। इसी क्रम में मुजफ्फरनगर से स्थानांतरित होकर आए वर्ष 2014 बैच के आईपीएस संजीव सुमन 6 जनवरी देर रात अलीगढ़ पहुंचे। उन्हें यहां आईपीएस कलानिधि नैथानी की जगह भेजा गया है। देर शाम उन्होंने यहां पहुंचकर एसपी सिटी, एसपी ग्रामीण व एसपी यातायात के अलावा शहर के तीनों सीओ के साथ बैठक कर जानकारी ली।

देर रात लिया चार्ज

जानकारी के मुताबिक, आईपीएस कलानिधि नैथानी को मेरठ का आईजी बनाया गया है। उनकी जगह पर आईपीएस संजीव सुमन को अलीगढ़ में एसएसपी पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसी के चलते शनिवार की देर रात 2014 बैच के आईपीएस संजीव सुमन कैंप कार्यालय पहुंचे। उन्होंने एसपी सिटी, एसपी ग्रामीण व एसपी यातायात के अलावा शहर के तीनों सीओ के साथ बैठक कर जानकारी ली। इसके बाद वे आईजी से मिलने चले गए। खबरों की मानें तो वो आज यानी कि 7 जनवरी को मीडिया से मुलाकात करेंगे।

अफसरों के सामने रखी अपनी बात

इस दौरान दौरान उन्होंने सर्किल वार जिले की समस्याओं और जरूरतों पर चर्चा की। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिये संदेश दिया है कि अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, कानून व्यवस्था सुदृढ़ रखी जाएगी। माडर्न पुलिसिंग, वैज्ञानिक तरीके से जांच पर जोर रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने पुलिसकर्मियों को जनसंवाद करने के भी आदेश जारी किए।

Gorakhpur: दबिश के दौरान दरोगा ने की महिला सिपाही से बदसलूकी, हुआ सस्पेंड

जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश पुलिस महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिन-रात मेहनत करके कई अभियान चला रही है वहीं कुछ पुलिसकर्मी उनकी मेहनत पर पलीता लगा रहे हैं। मामला गोरखपुर जिले का है जहां एक दरोगा ने दबिश के दौरान महिला सिपाही से ही बदसलूकी कर दी। जब मामला अफसरों तक पहुंचा तो दरोगा को निलंबित कर दिया गया। इसके साथ ही दरोगा के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई। एसएसपी का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर सख्त से सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।

ये है मामला

जानकारी के मुताबिक, ये पूरा मामला गोरखपुर जिले के सिकरीगंज थाने का है। जहां सिकरीगंज इलाके में महिला अपराध से जुड़े एक मामले में पिछले दिनों थाने पर तैनात दरोगा सरवर आलम दो महिला कांस्टेबल के साथ दबिश देने दूसरे जिले में गए थे। महिला सिपाही का आरोप है कि इसी दबिश के दौरान दरोगा ने उन के साथ बदसलूकी की। महिला कांस्टेबल ने इसकी शिकायत थानेदार से की थी। थानेदार के बाद मामला सीओ तक पहुंचा और फिर एसएसपी तक।

शुरू हुई विभागीय जांच

जिसके बाद एसएसपी ने सीओ की रिपोर्ट के आधार पर दरोगा सरवर आलम को सस्पेंड कर दिया। दरोगा के निलंबन के बाद उसके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि मामला सही पाया जाता है तो दरोगा के खिलाफ आगे और सख्त कार्रवाई हो सकती है।

पुलिस की गाड़ी में घुस कर लंगूर ने किया महिला पुलिसकर्मियों को परेशान, Video वायरल

सोशल मीडिया के दौर में आए दिन कुछ ना कुछ वायरल होता रहता है। इसी क्रम में शुक्रवार से सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, इस वीडियो में कुछ महिला पुलिसकर्मी कर में बैठी हुई है। इस दौरान एक लंगूर गाड़ी के अंदर घुसकर उन्हें परेशान कर रहा है। गाड़ी के बाहर खड़े पुलिसकर्मी लगातार हंस रहे थे. वही कुछ पुलिसकर्मी लंगूर को बाहर बुलाने का प्रयास कर रहे थे। सोशल मीडिया पर यह वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। बड़ी बात यह है इस गाड़ी में हथियार भी रखे हुए थे, ना चाहते हुए भी हादसा हो सकता था। ऐसे में लोगों ने पुलिसकर्मियों को ट्रोल करना शुरू कर दिया है।

लंगूर ने किया परेशान

जानकारी के मुताबिक अभी तक यह बात तो सामने नहीं आई है की वीडियो कहां का है लेकिन वीडियो में देखा जा सकता है कि लंगूर गाड़ी में घुस गया है और महिला कांस्टेबल को परेशान कर रहा है। बाहर खड़े अन्य पुलिसकर्मी हंस रहे हैं। कुछ देर बाद जब एक महिला कांस्टेबल कार का दरवाजा खोलकर बाहर निकली तो बंदर डांटने के बाद वहां से निकला और भाग गया।

लोग दे रहे बयान

वीडियो वायरल होते ही इस पर लोग तरह-तरह के बयान दे रहे हैं। एक ने लिखा कि कार में हथियार है, अगर वह उसे लेकर भागने लगे या गलती से गोली चल जाए तो क्या स्थिति बनेगी? एक अन्य ने लिखा कि इस बंदर के खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए, यह महिला पुलिसकर्मियों को परेशान कर रहा है। उसे कम से कम दस साल की सज़ा मिलनी चाहिए।

अयोध्या में ड्यूटी के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे पुलिसकर्मी, DG कानून व्यवस्था ने जारी किया सख्त आदेश

हर किसी के लिए 22 जनवरी का दिन बेहद खास है। इस दिन अयोध्या के भव्य मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा बड़े ही धूमधाम से की जायेगी। इसके लिए कई दिग्गजों को निमंत्रण भेजा गया है। 22 जनवरी के दिन अयोध्या में भारी तादाद में लोग भी पहुंचेंगे। ऐसे में कानून व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस विभाग के कंधों पर भरी जिम्मेदारी है। इसी जिम्मेदारी के चलते अब उत्तर प्रदेश के डीजी ने वहां तैनात पुलिसकर्मियों को सख्त आदेश जारी किया है। उन्होंने साफ शब्दों में ये कहा है कि अयोध्या में ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करेंगे।

डीजी कानून व्यवस्था ने जारी किया आदेश

जानकारी के मुताबिक, अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था संभालते वक्त किसी पुलिसकर्मी के द्वारा सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक न हो इसको ध्यान में रखते हुए मोबाइल फोन को न रखने के निर्देश दिए गए हैं। दरअसल, 22 जनवरी को अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर पुलिस को चप्पे-चप्पे पर तैनात किया गया है। ऐसे ही कर्मियों को निर्देश दिया गया है कि अनावश्यक तौर पर स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करें। ड्युटी के दौरान बेहद जरूरी काम के लिए फोन का इस्तेमाल कर सकते हैं।

अफसरों को भी मानना पड़ेगा आदेश

दरअसल, डीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि ज्यादातर यह देखा गया है कि प्रदेश में फील्ड ड्युटी के दौरान ज्यादातर पुलिसकर्मी स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। जिसके कारण उनका ध्यान भटक जाता है और वो एकाग्रता के साथ ड्युटी नहीं कर पाते है। इसी वजह से कई बार न चाहते हुए भी कुछ न कुछ घटित हो जाता है। कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार की ओर जारी पत्र के मुताबिक इसका पालन पुलिस कमिश्नर, एसएसपी व एसपी को भी करना होगा।

हापुड़ SP की बड़ी पहल, पुलिसकर्मियों को दिलवाया CPR प्रशिक्षण… अब अपनी सांसे देकर पुलिसकर्मी बचा सकेंगे दूसरों की जान

जिले की पुलिस अब अपनी सांस देकर दूसरों की जान बचाएगी। पुलिस को सीपीआर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत शुक्रवार को एसपी अभिषेक वर्मा ने मेरठ रोड पुलिस लाइन में की। वहां जिले के सभी थानों के प्रभारियों और पुलिसकर्मियों को डॉक्टरों ने बताया कि इमरजेंसी में घायल या पीड़ित को कैसे अपनी सांस देकर उसकी जिंदगी बचानी है। पुलिस के महिला-पुरुष जवान लोगों को सीपीआर देकर जान बचाएंगे।

पुलिसकर्मी ऐसे करेंगे मदद 
अक्सर आपने देखा होगा कि सीपीआर देने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं। अब प्रक्रिया को कंपलसरी कर दिया गया है। पुलिस को डॉक्टर बकायादा प्रशिक्षण दे रहे हैं। इमरजेंसी में पुलिस के जवान लोगों की जान बचा सकेंगे। प्रशिक्षण के दौरान सीपीआर या कृत्रिम श्वसन की जानकारी देते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि कई बार व्यक्ति की अचानक सांस रुक जाती है या फिर कार्डिएक अरेस्ट की स्थिति में सांस नहीं आती है। इस अवस्था में सीपीआर देकर लोगों की जान बचाई जा सकती है।

जवान बचाएंगे दूसरों की जान
सीपीआर के जरिए बेहोश व्यक्ति को सांस देने से फेंफड़ों को ऑक्सीजन मिलती है। इससे शरीर में पहले से मौजूद ऑक्सीजन वाला खून संचारित होने लगता है। सीएचसी के डॉक्टर प्रवीण गुप्ता की टीम ने पुलिसकर्मियों को सीपीआर प्रशिक्षण दिया। डॉक्टर प्रवीण गुप्ता ने बताया कि सीपीआर कोई दवा या इंजेक्शन नहीं है। यह एक तरह की प्रक्रिया है, इसका इस्तेमाल मरीज के शरीर पर किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में व्यक्ति की सांस रुक जाने पर सांस वापस लाने तक या दिल की धड़कन सामान्य होने तक छाती को दबाया जाता है। इससे शरीर में पहले से मौजूद खून संचारित होने लगता है और व्यक्ति के साथ कोई अनहोनी नहीं होती है।

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