उत्तर प्रदेश पुलिस की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और डीजी (प्रशिक्षण) तिलोत्तमा वर्मा आगामी 30 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रही हैं। 1990 बैच की यह अधिकारी न केवल अपनी काबिलियत और साहसिक नेतृत्व के लिए जानी जाती हैं, बल्कि इन्हें प्रदेश की पहली महिला डीजीपी बनाए जाने की संभावनाएं भी पहले काफी प्रबल थीं। वरिष्ठता, अनुभव और निष्पक्ष कार्यशैली के चलते तिलोत्तमा वर्मा का नाम हाल ही में डीजीपी की रेस में भी शामिल हुआ था।
कौन हैं तिलोत्तमा वर्मा
मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के शिमला की निवासी तिलोत्तमा वर्मा ने अपने लंबे कार्यकाल में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। वे लंबे समय तक केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर रहीं और लौटने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय की कमान संभाली। उनके नेतृत्व में प्रशिक्षण प्रणाली को आधुनिक और व्यावहारिक दिशा देने की पहल की गई।
वर्ष 2002 में हाथरस में बैंक लुटेरों से हुई मुठभेड़ के दौरान उन्होंने असाधारण साहस का परिचय दिया था, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पाने वाली वह यूपी पुलिस की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनीं।
हाल ही ने किया vrs के लिए आवेदन
उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी पुलिस सेवा से जुड़ी रही है — उनके पति आशीष गुप्ता भी यूपी कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रहे हैं। हाल ही में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन किया है।
तिलोत्तमा वर्मा के कार्यकाल में महिला पुलिसिंग को नई दिशा मिली। उनके नेतृत्व में महिला प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सशक्त किया गया और फील्ड ड्यूटी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए। एटीएस की महिला कमांडो यूनिट का गठन भी इस सोच का परिणाम है।
उनकी सेवानिवृत्ति के साथ ही पुलिस महकमे में एक साहसिक, संवेदनशील और दूरदर्शी महिला अधिकारी की विदाई होगी, जिनका कार्यकाल यूपी पुलिस में महिला नेतृत्व की मिसाल बनकर याद किया जाएगा।