गाजियाबाद। पुलिस कमिश्नरेट ने भ्रष्टाचार और कार्य में लापरवाही के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। फीडबैक सेल के माध्यम से प्राप्त शिकायतों की जांच के बाद दो मुख्य आरक्षियों और दो उप निरीक्षकों को निलंबित कर दिया गया, जबकि एक मुख्य आरक्षी को लाइन हाजिर किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आम लोगों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर लगातार निगरानी की जा रही है और दोषी पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।
पारदर्शी रूप से काम कर रहा फीडबैक रूम
कमिश्नरेट पुलिस के अनुसार, नागरिकों को बेहतर और पारदर्शी पुलिस सेवा उपलब्ध कराने के लिए फीडबैक सेल और कमांड कंट्रोल रूम सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इन माध्यमों से मिलने वाली शिकायतों और सुझावों की जांच के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय की जाती है।
हाल ही में प्राप्त शिकायतों की जांच में थाना कौशांबी में तैनात मुख्य आरक्षी दिनेश कुमार और थाना शालीमार गार्डन में तैनात मुख्य आरक्षी मकसूद खान के खिलाफ आरोप सही पाए गए। इसके बाद पुलिस उपायुक्त नगर और पुलिस उपायुक्त ट्रांस हिंडन ने दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
इसी क्रम में ड्यूटी के दौरान लापरवाही की शिकायतों पर थाना नंदग्राम में तैनात उप निरीक्षक प्रभाकर सिंह और थाना इंदिरापुरम में तैनात उप निरीक्षक सुखवीर सिंह को भी निलंबित किया गया है। वहीं, सहायक पुलिस आयुक्त नंदग्राम कार्यालय में तैनात मुख्य आरक्षी मोहम्मद आदिल को लाइन हाजिर कर दिया गया।
अफसरों ने कहा ये
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिसिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए फीडबैक सेल की भूमिका लगातार मजबूत की जा रही है। लोगों को बिना किसी दबाव या डर के अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कमिश्नरेट ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता और लापरवाही के मामलों में भविष्य में भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि पुलिस व्यवस्था में जनता का भरोसा और मजबूत हो सके।