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आखिर कब तक UP समेत इन आठ राज्यों की पुलिसिंग चलेगी कार्यवाहक DGP के भरोसे…

  उत्तर प्रदेश में पिछले डेढ़ साल से पुलिस मुखिया की कुर्सी कार्यवाहक के भरोसे है।…

1996 बैच की IPS सतवंत अटवाल त्रिवेदी बनी हिमाचल की DGP, मिला अतिरिक्त कार्यभार

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक बार फिर तेज तर्रार महिला अफसर पर विश्वास जताया है. साल 1996 बैच की आईपीएस अधिकारी सतवंत अटवाल त्रिवेदी को हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है. मौजूदा वक्त में वे स्टेट विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो की एडीजी हैं. साल 2023 में 23 जून से लेकर 13 जुलाई तक वे पहले भी हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार संभाल चुकी हैं. उस वक्त डीजीपी रहे संजय कुंडू लंबी छुट्टी पर गए थे.

सतवंत अटवाल ने अपनी काबिलियत को किया है साबित

हिमाचल प्रदेश की तेज तर्रार महिला अफसर ने आपदा के दौरान बेहतरीन काम कर अपनी काबिलयत को साबित किया. जब सतवंत अटवाल त्रिवेदी के पास हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार आया, तो उन्होंने कुल्लू, मनाली और मंडी में आई आपदा के दौरान अपनी टीम के साथ बेहतरीन काम कर प्रदेश के साथ देशभर में अपना नाम बनाया. आपदा के दौरान बेहतरीन काम करने का ही तोहफा अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सतवंत अटवाल को दिया है. जानकारों की मानें, तो लंबे वक्त तक सतवंत अटवाल त्रिवेदी के पास ही यह अतिरिक्त कार्यभार रहने वाला है.

हिमाचल हाईकोर्ट ने दिए थे संजय कुंडू को पद से हटाने के आदेश

बता दें कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 26 दिसंबर, 2023 को संजय कुंडू को डीजीपी पद से हटाने के आदेश दिए थे. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि संजय कुंडू को बतौर डीजीपी और शालिनी अग्निहोत्री को बतौर एसपी कांगड़ा वर्तमान पोस्टिंग से हटाया जाना चाहिए. इसके बाद 2 जनवरी की सुबह संजय कुंडू को डीजीपी के पद से हटकर आयुष विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया. शाम होते-होते मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने सतवंत अटवाल त्रिवेदी को हिमाचल प्रदेश का नया पुलिस महानिदेशक बना दिया है.

IPS Arun Mohan Joshi देश के सबसे कम उम्र के IG, 23 साल में बन गए थे IPS

वर्ष 2006 बैच के आईपीएस अरुण मोहन जोशी देश के सबसे कम उम्र (40 साल) के आईजी बन गए हैं। कुछ दिन पहले ही शासन ने उनकी डीपीसी पर मुहर लगाई थी। उत्तराखंड के चकराता निवासी आईपीएस अरुण मोहन जोशी वर्ष 2006 में सबसे कम उम्र (23 साल) में आईपीएस बने थे।

हालांकि, इसके बाद देश में अन्य अफसर कम उम्र में आईपीएस बनने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा चुके हैं। आईजी के मामले में 2004 बैच के आईपीएस गौरव राजपूत वर्ष 2022 में 41 साल की उम्र में देश के सबसे कम उम्र के आईजी बने थे। अब उत्तराखंड कैडर के 2006 बैच के आईपीएस अरुण मोहन जोशी 40 साल की उम्र में आईजी बने हैं।

आईजी अरुण मोहन जोशी की पढ़ाई देहरादून और हरिद्वार में हुई। उनके तीन भाई और एक बहन हैं। आईपीएस बनने से पहले वह आइआइटी रुड़की में इंजीनिय¨रग कर रहे थे।

22 दिसंबर 2023 को संपन्न हुई थी डीपीसी

22 दिसंबर, 2023 को उत्तराखंड सचिवालय में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की डीपीसी संपन्न हुई। डीपीसी में वर्ष 2006 बैच की आईपीएस अधिकारी पुलिस उप महानिरीक्षक स्वीटी अग्रवाल, अरुण मोहन जोशी, अनंत शंकर ताकवाले तथा राजीव स्वरूप को एक जनवरी 2024 से पुलिस महानिरीक्षक पद पर पदोन्नति प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

स्वीटी अग्रवाल के प्रतिनियुक्ति पर होने के कारण उन्हें परफार्मा पदोन्नति प्रदान करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा वर्ष 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी पुलिस अधीक्षक सुखबीर सिंह को एक जनवरी 2024 से पुलिस उप महानिरीक्षक पद पर पदोन्नति प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

वर्ष 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार तथा धीरेंद्र गुंज्याल को एक जनवरी 2024 से सेलेक्शन ग्रेड प्रदान करने का निर्णय लिया गया। सोमवार को पदोन्नति पाने वाले सभी अधिकारियों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में पदोन्नति बैज प्रदान किए।

 

बदायूं में खौफनाक ऑनर किलिंग: बेटी और उसके प्रेमी को फावड़े से काट पिता ने थाने में किया सरेंडर

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UP में 7 सीनियर IPS अधिकारियों का हुआ तबादला, CP कानपुर बने IPS AKHIL KUMAR

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PM MODI का कल अयोध्या आगमन, चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

अयोध्या के राम मंदिर में राम लला की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होने जा रही है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 दिसंबर को अयोध्या में चल रही तैयारियों का जायजा लेने के लिए पहुंच रहे हैं. उनके दौरे को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. इस दौरान पीएम मोदी अयोध्या एयरपोर्ट और पुर्विकसित रेलवे स्टेशन का उद्घाटन करेंगे.

लिहाजा, अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस फोर्स की तैनाती कर दी गई है. इसके साथ ही जीआरपी और RPF के जवानों के साथ समन्वय कर अयोध्या रेलवे स्टेशन और आस-पास के सभी रूट पर सिक्योरिटी बढ़ाई गई है. अयोध्या जंक्शन का नाम बदलकर अब आधिकारिक रूप से अयोध्या धाम  कर दिया गया है. यहां BDS और एंटी साबोटाज चेक की टीमें चेकिंग कर रही हैं. 200 से अधिक सब इंस्पेक्टर और सिपाहियों को अतिरिक्त सुरक्षा में लगाया गया है. इसके अलावा पीएसी के जवानों को भी तैनात किया गया है.

240 करोड़ रुपये से पुनर्विकसित हुए अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन

बताते चलें कि अयोध्या रेलवे स्टेशन को पुनर्विकसित किया गया है. इसके पहला चरण, जिसे अयोध्या धाम जंक्शन रेलवे स्टेशन के नाम से जाना जाता है, उसे 240 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है. तीन मंजिला आधुनिक रेलवे स्टेशन की इमारत में लिफ्ट, एस्केलेटर, फूड प्लाजा, पूजा की जरूरतों के लिए दुकानें, क्लॉक रूम, चाइल्ड केयर रूम, वेटिंग हॉल जैसी सभी आधुनिक सुविधाओं हैं. स्टेशन भवन ‘सभी के लिए सुलभ’ और ‘आईजीबीसी प्रमाणित ग्रीन स्टेशन भवन’ होगा.

रेलवे स्टेशन की सुरक्षा संभालेगी जीआरपी और आरपीएफ 

हर संदिग्ध वस्तु और व्यक्ति की चेकिंग की जा रही है. आने जाने वालों लोगों की तलाशी ली जा रही है, ताकि कोई गड़बड़ी न कर सके. आने वाले समय में अयोध्या से शुरू होने वाली और अयोध्या होकर गुजरने वाली ट्रेनों की संख्या में बड़े पैमाने पर इजाफा होगा. लिहाजा, जीआरपी और RPF मिलकर ट्रेन एस्कॉर्ट और रेलवे स्टेशन पर सिक्योरिटी की जिम्मेदारी निभाएंगे.

20 जनवरी से आम लोगों के लिए राम मंदिर हो जाएगा बंद 

यूपी के स्पेशल डीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था की खुद निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने गुरुवार को अयोध्या की सुरक्षा को लेकर निर्देश जारी किए हैं. 22 जनवरी को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम को देखते हुए 20 जनवरी से आम लोगों के लिए अयोध्या राम मंदिर के दर्शन बंद हो जाएंगे. इसके बाद 23 जनवरी से आम लोग राम मंदिर के दर्शन कर सकेंगे.

यूपी एसएसएफ संभालेगी राम मंदिर और एयरपोर्ट की सुरक्षा  

इस दौरान पूजा, पाठ, धार्मिक कार्य चलते रहेंगे. 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के लिए यूपी पुलिस केंद्र की एजेंसियों के संपर्क में है. यूपी पुलिस की सभी स्पेशल यूनिट्स की अयोध्या में तैनात की गई है. पुलिस बल की पहले ही तैनाती की जा चुकी है. राम मंदिर और अयोध्या एयरपोर्ट की सुरक्षा यूपी एसएसएफ के जिम्मे कर दी गई है. 22 जनवरी के कार्यक्रम के लिए होटल एसोसिएशंस, टैक्सी यूनियन के लोगों से भी बात-चीत की गई है. होटल वाले तय दाम से अधिक पैसा नहीं ले सकेंगे.

अपनी जाति वाले सिपाहियों पर नहीं लेते एक्शन….आरोपों पर ADCP लखन सिंह का बयान

कानपुर पुलिस विभाग में इन दिनों एक लेटर की चर्चा है. सोशल मीडिया पर ये लेटर वायरल हो रहा है. जो हाइवे किनारे एक धर्म कांटा पर चस्पा किया गया था. लेटर किसी सिपाही द्वारा लिखा बताया जा रहा है. इसमें एडीसीपी (अपर पुलिस उपायुक्त) लखन सिंह यादव पर जातिवादी होने के आरोप लगाए हैं. हालांकि, एडीसीपी ने इसे महकमे को बदनाम करने की साजिश बताया है.

लेटर के जरिए एडीसीपी लखन सिंह यादव के ऊपर अपनी जाति के लोगों की तरफदारी करने का आरोप लगाया गया है. इसमें लिखा है कि एडीसीपी अपनी जाति के लोगों को सपोर्ट करते हैं. अगर उनकी जाति का सिपाही उनके पास किसी काम से जाता है तो वह उससे ढंग से मिलते हैं. बाकी लोगों से अभद्रता करते हैं.

कंप्लेंट मिलने पर अपनी जाति के सिपाहियों को वक्त देते हैं, जबकि दूसरी जाति के सिपाहियों पर तत्काल एक्शन ले लेते हैं. यही काम वसूली की शिकायत मिलने पर आरोपी सिपाहियों के साथ किया था. उन्होंने अपनी जाति के आरोपी सिपाही को छोड़ दिया था. जांच के नाम पर खानापूर्ति की गई.

एडीसीपी ने इस पूरे मामले में क्या कहा?

बता दें कि लखन सिंह यादव कानपुर ईस्ट के एडीसीपी हैं. साथ ही 112 कंट्रोल रूम के भी प्रभारी हैं. इस मामले पर उनका कहना है कि 112 कंट्रोल रूम का प्रभारी बनने के बाद हाइवे पर वसूली की शिकायत मिलने पर कई पुलिसकर्मियों पर एक्शन लिया है.

पिछले दिनों भी शिकायत मिलने पर कई पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है. यह उन्हीं में से किसी की शरारत लगती है. जहां पर लेटर चस्पा मिला है वहां पर कोई सीसीटीवी नहीं है. फिर भी इस मामले की हम जांच कर रहे हैं. पुलिस विभाग में अनुशासन होता है.  किसी को कोई शिकायत है तो सीनियर के पास जा सकता है.

बकौल लखन सिंह- इस तरह की भाषा लिखकर पुलिस विभाग को बदनाम करना, अधिकारियों को बदनाम करना, यह गलत है. मेरे ऊपर जो जातिवाद के आरोप अब लगाए गए हैं ऐसा अभी तक किसी ने कहा नहीं. कानपुर में मेरे ऊपर डिप्टी जॉइंट कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर भी हैं. अगर किसी को कोई शिकायत हो है उनसे मेरी शिकायत कर सकता है. फिलहाल, इस मामले की जांच कराई जा रही है. जिसका भी यह काम होगा उसपर कार्रवाई की जाएगी.

उन्नाव SP ऑफिस में आत्मदाह करने वाले युवक की इलाज के बाद मौत, CO-SHO पर गिरी गाज

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में पुलिस से आहत एक युवक ने एसपी ऑफिस के अंदर बुधवार…

SP सिटी को मीट माफिया से दोस्ती पड़ गई भाई, एक झटके में हो गया तबादला

मेरठ में SP सिटी पीयूष कुमार सिंह का आज तबादला कर सुल्तानपुर PTS कर दिया गया है। उनकी जगह आयूष विक्रम को एसपी सिटी का कार्यभार सौंपा गया है। जहां पीयूष कुमार सिंह का तबादला हुआ है तो वहीं दूसरी तरफ चर्चाओं का बाजार भी इस बात से गर्म चल रहा है कि आईपीएस पीयूष को मीट माफिया से दोस्ती भारी पड़ी गई है, या यह कहना भी गलत न होगा की एक आरोपी से दोस्ती का ही खामियाजा है कि उनका तबादला दूसरे जिले में कर दिया है।

दरअसल आईपीएस पीयूष का सुल्तानपुर PTS तबादला होने की असली वजह मीट माफिया के बेटे से दोस्ती बताई जा रही है। सूत्र की माने तो मीट माफिया की पिस्टल को आईपीएस ने “खिलौने” में बदली थी। असली पिस्टल से एक रेस्त्रां मालिक को धमकाया गया था। मीट माफिया के रेपिस्ट बेटे को बचाने का भी प्रयास किया गया था। मीट माफिया की कई कांडों में सरपरस्ती की गई थी। 2 दिन तक हिंदू युवती से रेपकांड को भी दबाया गया था। SSP के दखल के बाद ही रेप का केस दर्ज हो सका था।

मेरठ शहर में मीट कारोबारी का 500 अवैध मीट दुकानों का संचालन है। मीट माफिया के इशारे पर शहर में अवैध मीट शॉप धडल्ले से चल रही है। भाजपा के एक मंत्री ने मीट माफिया की शिकायत की थी। भाजपा नेता ने इस मामले में खुलकर विरोध भी किया था।