आजमगढ़। शंभूपुर हत्याकांड के बाद अपने माता-पिता और भाई को खो चुकीं दो बच्चियों के भविष्य की जिम्मेदारी अब पुलिस ने उठाने का फैसला किया है। आजमगढ़ के एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने 10 वर्षीय परी और 11 माह की शानवी को गोद लेने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि दोनों बच्चियों की पढ़ाई से लेकर आगे की जरूरतों में वह परिवार के साथ खड़े रहेंगे।
ये था मामला
शंभूपुर गांव में हुई इस वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। घटना में अरविंद सिंह की पत्नी बबिता सिंह, आठ वर्षीय बेटे शौर्य और दो पुजारियों की हत्या हुई थी। बाद में पुलिस के साथ मुठभेड़ में अरविंद सिंह की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार में उसकी बुजुर्ग मां और दोनों बच्चियां ही बची हैं।
एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने बच्चियों की जिम्मेदारी लेने के साथ अपने एक महीने का वेतन भी उनके भविष्य के लिए देने की बात कही है। उन्होंने कहा, “मेरा एक बेटा और एक बेटी है। आज से मेरा एक बेटा और तीन बेटियां हो गई हैं।”
पांच हजार पुलिसकर्मी देंगे एक दिन का वेतन
बच्चियों की आर्थिक मदद के लिए आजमगढ़ पुलिस के करीब पांच हजार कर्मचारी भी आगे आए हैं। सभी पुलिसकर्मी अपने एक दिन का वेतन देने वाले हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, एसएसपी की ओर से दी जाने वाली एक माह की सैलरी और पुलिसकर्मियों के एक दिन के वेतन से मिलने वाली रकम पीड़ित परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की बात कही गई है। इसके अलावा घटना में मारे गए दोनों पुजारियों के परिवारों के लिए भी शासन को हर महीने आठ-आठ हजार रुपये बच्चियों के नाम एफडी के रूप में सुरक्षित की जाएगी।
प्रशासन की ओर से भी दोनों बच्चियों और अन्य पीड़ित परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की बात कही गई है। इसके अलावा घटना में मारे गए दोनों पुजारियों के परिवारों के लिए भी शासन को हर महीने आठ-आठ हजार रुपये की आर्थिक सहायता का प्रस्ताव भेजा गया है।
पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ के बाद अरविंद की तलाशी में 18 कारतूस, टॉर्च, भांग की पुड़िया और खैनी बरामद हुई थी। पुलिस का कहना है कि वारदात के बाद उसने खुद को पुलिस से बचाने की तैयारी कर रखी थी। घटना की जांच और अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है।