कानपुर। थाने पहुंचने वाले हर व्यक्ति के लिए अपनी बात पुलिस तक पहुंचाना आसान नहीं होता। खासकर उन लोगों के लिए, जो सुन या बोल नहीं सकते। ऐसे लोगों की शिकायत और परेशानी समझने में भाषा की बाधा सामने न आए, इसके लिए कानपुर पुलिस ने अपने जवानों को सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण देना शुरू किया है।
अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के मौके पर पुलिस ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यशाला में 150 से अधिक पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण में इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर के साथ चाइल्ड वेलफेयर पुलिस ऑफिसर और मिशन शक्ति से जुड़ी महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हुईं।
पुलिसकर्मियों को सिखाई गई भाषा
कार्यशाला में पुलिसकर्मियों को साइन लैंग्वेज के शुरुआती संकेतों से परिचित कराया गया। इसमें अक्षरों और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले शब्दों के अलावा अपनी बात और भावनाएं इशारों के जरिए समझाने के तरीके भी बताए गए। पुलिसकर्मियों ने प्रशिक्षकों की मदद से इन संकेतों का अभ्यास भी किया।
इस प्रशिक्षण का दायरा केवल सामान्य बातचीत तक सीमित नहीं रखा गया। पुलिसकर्मियों को यह भी समझाया गया कि शिकायत दर्ज कराने, कानूनी प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई से संबंधित जरूरी जानकारी ऐसे व्यक्ति को सांकेतिक भाषा के जरिए किस तरह समझाई जा सकती है।
महिला और बाल अपराध के मामलों में इस पहल को खास महत्व दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई बार संवाद की कमी के कारण पीड़ित अपनी बात ठीक से नहीं रख पाता। ऐसे में सांकेतिक भाषा की शुरुआती समझ पुलिसकर्मियों के लिए मददगार साबित हो सकती है।
सीपी ने कहा ये
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कहा कि पुलिस व्यवस्था में समाज के प्रत्येक वर्ग की पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है। किसी व्यक्ति की भाषा उसकी शिकायत सुनने में बाधा नहीं बननी चाहिए।
एडीसीपी महिला अपराध सेल स्नेहा तिवारी ने बताया कि अखिल उत्तर प्रदेश बधिर संस्था के सहयोग से प्रशिक्षण कराया गया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों को दिव्यांगजनों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें अपने अधिकारों तथा समस्याओं को सहज तरीके से सामने रखने में मदद करना है।
कार्यक्रम के समापन पर प्रशिक्षण लेने वाले पुलिसकर्मियों को प्रमाण पत्र दिए गए। सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण देने वाले विशेषज्ञों को भी सम्मानित किया गया।