झांसी शहर में एक थाना इन दिनों खासा चर्चा में है, लेकिन वजह न कोई हाई प्रोफाइल केस है और न ही कोई बड़ा अपराध। ये थाना अपने अलग तरीके से काम करने के कारण सुर्खियों में है। नाम है विद्युत थाना। यहां पर न तो अपराधियों को हथकड़ी पहनाई जाती है और न ही सलाखों के पीछे भेजा जाता है।
इसलिए बनाया गया है थाना
यह थाना खासतौर पर बिजली चोरी के मामलों से निपटने के लिए बनाया गया है। जैसे ही विभाग को किसी उपभोक्ता द्वारा बिजली चोरी की सूचना मिलती है, पुलिस और विद्युत विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर जांच करती है। यदि चोरी की पुष्टि होती है, तो आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होती है। लेकिन गिरफ्तारी नहीं होती।
इस थाने में आरोपी को पहले जुर्माना भरने का मौका दिया जाता है। अगर तय समय में यह जुर्माना भर दिया जाए, तो मामला वहीं बंद कर दिया जाता है। यदि आरोपी भुगतान नहीं करता, तो केस सीधे अदालत में भेजा जाता है और चार्जशीट दाखिल कर दी जाती है।
थाना प्रभारी मोहम्मद इमरान बताते हैं कि इस थाने का उद्देश्य लोगों को जेल भेजना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक दंड के ज़रिए सुधारना है। यहां पर न लॉकअप है, न पूछताछ का दबाव, बस एक बात तय है — अगर चोरी पकड़ी गई तो जेब से भरपाई करनी होगी।
सिविल पुलिस रहती है तैनात
यह मॉडल सिर्फ झांसी में ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के लगभग हर जिले में लागू है। इन थानों में सिविल पुलिस तैनात रहती है, लेकिन काम का तरीका पूरी तरह अलग होता है। इस थाने का सिस्टम लोगों को सोचने पर मजबूर करता है कि सुधार जरूरी है, मगर हमेशा सलाखों के पीछे भेज कर नहीं, कभी-कभी जेब पर असर डालकर भी जिम्मेदारी सिखाई जा सकती है।