वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस अब अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा ले रही है। नए कानूनी प्रावधानों के तहत पुलिस ने यूनिक एसआईडी (साक्ष्य पहचान संख्या) आधारित व्यवस्था को तेजी से लागू किया है। इस सिस्टम का उद्देश्य अपराध स्थल से जुटाए गए सबूतों को सुरक्षित रखना और अदालत में उन्हें मजबूत डिजिटल साक्ष्य के रूप में पेश करना है, ताकि तकनीकी खामियों का लाभ उठाकर आरोपी कानून की पकड़ से बच न सकें।
अफसरों ने बताया ये
कमिश्नरेट पुलिस के अनुसार, पिछले छह महीनों में दर्ज अधिकांश मामलों में डिजिटल साक्ष्यों को ई-साक्ष्य पोर्टल से जोड़ा जा चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, कुल 5,129 एफआईआर में से 4,776 मामलों में यूनिक एसआईडी तैयार की गई है। यानी करीब 93 प्रतिशत मामलों के डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए जा चुके हैं। इससे जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनने की उम्मीद है।
इस व्यवस्था के तहत किसी भी अपराध स्थल से बरामद वस्तुओं, दस्तावेजों, गवाहों के बयान, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी को डिजिटल रूप से ई-साक्ष्य पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। इसके बाद प्रत्येक मामले के लिए एक यूनिक एसआईडी जेनरेट होती है। यह डिजिटल पहचान साक्ष्यों की पूरी ट्रैकिंग सुनिश्चित करती है और उनके साथ छेड़छाड़ की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।
गोमती जोन का प्रदर्शन अच्छा
तीनों जोन में गोमती जोन का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है, जहां 97 प्रतिशत मामलों में यूनिक एसआईडी तैयार की गई है। वहीं लक्सा थाना और महिला थाना ने 100 प्रतिशत डिजिटल साक्ष्य अपलोड कर मिसाल पेश की है। दूसरी ओर, वरुणा और काशी जोन में भी 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में यह प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल का कहना है कि यूनिक एसआईडी प्रणाली से जांच की गुणवत्ता बेहतर होगी और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्य अधिक मजबूत बनेंगे। उनका मानना है कि यह डिजिटल पहल न केवल जांच को आधुनिक बनाएगी, बल्कि अपराधियों के खिलाफ दोष सिद्ध करने की प्रक्रिया को भी अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बनाएगी।