उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध के खिलाफ चल रही मुहिम को बड़ी सफलता मिली है। साइबर क्राइम मुख्यालय के अंतर्गत स्थापित साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (CFMC) की मदद से अब तक 425.7 करोड़ रुपये की ठगी की रकम को समय रहते सुरक्षित किया गया है। यह राशि बैंक खातों में ‘लियन’ के जरिए रोककर बचाई गई, जिससे पीड़ितों की मेहनत की कमाई अपराधियों तक पहुंचने से पहले ही सुरक्षित हो सकी।
हासिल किया प्रथम स्थान
इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। डीजी साइबर अपराध बिनोद कुमार सिंह ने बताया कि यदि बैंक और एजेंसियां तेजी से समन्वय कर कार्रवाई करें, तो साइबर ठगी के मामलों में बड़ा नुकसान होने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि रियल-टाइम रिस्पॉन्स सिस्टम, संदिग्ध खातों पर सख्त निगरानी और बेहतर डाटा शेयरिंग इस लड़ाई में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
इसी कड़ी में लखनऊ स्थित साइबर क्राइम मुख्यालय में विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए त्वरित कार्रवाई, म्यूल अकाउंट्स की पहचान और शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
डीजी ने दी जानकारी
डीजी ने जानकारी दी कि NCRP पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन पर लगातार बढ़ती शिकायतों को देखते हुए 30 सीटों वाला नया कॉल सेंटर भी शुरू किया गया है। जून 2025 में जहां लियन की गई राशि 22.64 करोड़ रुपये थी, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर 41.10 करोड़ रुपये पहुंच गई।
उन्होंने बदायूं की एक पीड़िता का उदाहरण देते हुए बताया कि नौ लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी को समय रहते रोक लिया गया। इस तरह के मामलों में बैंकों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है।