खनन माफिया से कनेक्शन के आरोपों में घिरे IPS माधव उपाध्याय, जांच तेज

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राजस्थान पुलिस के एक युवा आईपीएस अधिकारी इन दिनों चर्चा में हैं, लेकिन वजह उपलब्धियां नहीं बल्कि उन पर लगे गंभीर आरोप हैं। 2022 बैच के अधिकारी माधव उपाध्याय, जो भीलवाड़ा में सहायक पुलिस अधीक्षक (सीओ सदर) के पद पर तैनात थे, अब एक अवैध वसूली प्रकरण को लेकर विवादों में घिर गए हैं।

ये है मामला 

दरअसल, गार्नेट खनन से जुड़े एक संगठित गिरोह का हाल ही में खुलासा हुआ है, जिसमें कुछ आरोपियों ने पूछताछ के दौरान माधव उपाध्याय का नाम भी लिया। इसके बाद प्रशासन ने एहतियातन कार्रवाई करते हुए उन्हें एपीओ (Awaiting Posting Orders) कर दिया है। हालांकि, उपाध्याय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।

माधव उपाध्याय ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 में ऑल इंडिया रैंक 148 हासिल की थी और राजस्थान कैडर में नियुक्त हुए थे। प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली पोस्टिंग भीलवाड़ा में हुई, जहां उन्होंने कोटड़ी, बीगोद और जहाजपुर क्षेत्रों में अवैध खनन के खिलाफ कई अभियान चलाए। सितंबर 2025 में बनास नदी में अवैध रेत खनन के खिलाफ उनकी कार्रवाई भी चर्चा में रही थी।

पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब पुलिस ने गार्नेट खनन की आड़ में वसूली करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। इस गिरोह का सरगना अजय पांचाल बताया जा रहा है, जिसके साथ नंद सिंह उर्फ पिंटू, नारायण गुर्जर और कालू गुर्जर को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि ये लोग खुद को विधायक गोपीचंद मीणा का करीबी बताकर कारोबारियों से पैसे वसूलते थे और कार्रवाई का डर दिखाते थे।

पूछताछ के दौरान सामने आया कि अजय पांचाल पहले पुलिस के लिए मुखबिर के रूप में काम करता था और इसी वजह से उसका संपर्क माधव उपाध्याय से था। उपाध्याय का कहना है कि उन्होंने केवल उससे मिली सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई की थी और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि से उनका कोई संबंध नहीं है।

विधायक गोपीचंद मीणा ने भी स्पष्ट किया है कि अजय पांचाल उनका कोई आधिकारिक प्रतिनिधि नहीं है। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने जांच तेज कर दी है। संयुक्त शासन सचिव डॉ. धीरज कुमार सिंह के आदेश पर उपाध्याय को एपीओ किया गया, जबकि एसपी धर्मेंद्र सिंह यादव की निगरानी में जांच जारी है। इस केस की जांच अजमेर रेलवे के एसपी नरेंद्र सिंह को सौंपी गई है।

हो रही जांच

फिलहाल पुलिस आरोपियों के मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है। चारों आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ जारी है, जिससे आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है।

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