गाजियाबाद पुलिस अपनी एनकाउंटर वाली सख्त छवि के लिए जानी जाती है। अक्सर खबरें आती हैं कि अपराधियों के सामने पुलिस सेकेंडों में फैसला लेती है और उनके पैरों का सटीक निशाना लगाकर उन्हें बेअसर कर देती है। लेकिन हाल ही में मोदीनगर के निवाड़ी थाने से सामने आया एक वीडियो इस धारणा पर सवाल खड़ा कर रहा है।
ये है मामला
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में दिख रहा है कि डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्रनाथ तिवारी थाने का निरीक्षण कर रहे थे। निरीक्षण के दौरान सभी पुलिसकर्मियों और दारोगाओं से उनके हथियार जमीन पर रखने को कहा गया। इसके बाद उन्हें हथियार खोलकर दोबारा लगाने को कहा गया। लेकिन वीडियो में साफ दिख रहा है कि कई पुलिसकर्मी इस प्रक्रिया में जद्दोजहद करते नजर आए और कुछ पिस्टल खोलने में भी असमर्थ रहे।
यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों के बीच सवाल उठ रहा है कि अगर यही स्थिति किसी असली मुठभेड़ में होती तो परिणाम क्या होता। जहां गाजियाबाद पुलिस की मुठभेड़ों में तेज निर्णय लेने की कहानी प्रचलित है, वहीं यह वीडियो दिखाता है कि थाने के भीतर हथियार संभालने की क्षमता भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
घातक साबिक हो सकती है लापरवाही
पुलिस अधिकारियों ने वीडियो के सामने आने के बाद चुप्पी साध ली है और केवल प्रेस नोट में कहा कि निरीक्षण में ‘सब कुछ ठीक’ पाया गया। लेकिन वीडियो कुछ और ही कहानी बयां करता है। सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो पुलिस की एनकाउंटर वाली छवि पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है और सवाल उठाता है कि क्या प्रशिक्षण और तैयारी की कमी भविष्य में किसी पुलिसकर्मी के लिए घातक साबित हो सकती है।