उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीख आने में अभी वक्त है, लेकिन पुलिस महकमे में चुनावी तैयारियों का असर दिखने लगा है। आने वाले चुनाव में किसी तरह का प्रशासनिक पक्षपात न हो, इसके लिए शासन ने पुलिस विभाग में तैनात अधिकारियों की पोस्टिंग का हिसाब-किताब जुटाना शुरू कर दिया है। इस कवायद के पूरी होने के बाद प्रदेश के कई जिलों में पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदल सकती हैं। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में नोएडा और वाराणसी जैसे महत्वपूर्ण कमिश्नरेट भी शामिल हैं।
डीजीपी मुख्यालय में तैयार हो रहे रिकॉर्ड के मुताबिक, करीब 250 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की समीक्षा की जा रही है। इनमें 15 आईपीएस अधिकारी भी हैं। इनके अलावा एएसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर स्तर के पुलिसकर्मियों का कार्यकाल भी जांचा जा रहा है।
किन जिलों में बदल सकता है पुलिस का नेतृत्व?
गौतमबुद्धनगर में लक्ष्मी सिंह नवंबर 2022 से पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। वहीं, मोहित अग्रवाल मार्च 2024 से वाराणसी के पुलिस कमिश्नर हैं। चुनाव आयोग के 31 मई 2027 के कटऑफ मानक को देखते हुए दोनों कमिश्नरेट के प्रमुखों की पोस्टिंग पर भी विचार हो सकता है। हालांकि, इसे अभी संभावित बदलाव ही माना जा रहा है।
इसके अलावा लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, आगरा, मेरठ और गाजियाबाद में तैनात अधिकारियों का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में है। यानी आने वाले समय में सिर्फ छोटे जिलों ही नहीं, बल्कि प्रदेश के बड़े पुलिस प्रशासनिक केंद्रों में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
15 नवंबर तक पूरी करनी है प्रक्रिया
डीजीपी मुख्यालय की स्थापना शाखा ने 29 अक्टूबर को संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा था। इसमें 15 नवंबर तक पोस्टिंग की समीक्षा और जरूरी स्थानांतरण या समायोजन की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।
इस बार केवल एक जिले में तीन साल से ज्यादा की तैनाती ही आधार नहीं होगी। अधिकारी का गृह जनपद, पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उसकी भूमिका और चुनाव संबंधी शिकायतें भी देखी जाएंगी। प्रमोशन के बाद उसी जिले में मिली नई पोस्टिंग के मामले में पहले की तैनाती का समय भी जोड़ा जाएगा।
2022 चुनाव से पहले भी बदली गई थीं जिम्मेदारियां
यूपी में यह पहली बार नहीं है जब विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस विभाग में इस तरह की कवायद हो रही है। 2022 के चुनाव से पहले अक्टूबर 2021 में 29 इंस्पेक्टर और 185 दारोगा समेत कुल 214 पुलिसकर्मियों को स्थानांतरित किया गया था। इस बार समीक्षा का दायरा अधिक व्यापक बताया जा रहा है। अब देखना होगा कि 15 नवंबर की समयसीमा पूरी होने के बाद शासन किन अधिकारियों को नई जिम्मेदारी सौंपता है।