लखनऊ। सोशल मीडिया पर आने वाला एक संदेश किसी की जिंदगी बचाने की वजह बन सकता है। उत्तर प्रदेश में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर आत्महत्या से जुड़े संकेत मिलने पर पुलिस तत्काल कार्रवाई कर रही है। एक जनवरी 2023 से 10 अक्टूबर 2026 तक इस व्यवस्था के जरिए चार हजार से अधिक लोगों की जान बचाने का दावा किया गया है। इस पहल में तकनीकी निगरानी के साथ पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और पीड़ितों की काउंसलिंग अहम कड़ी बन रही है।
दरअसल, यूपी पुलिस और मेटा के बीच वर्ष 2022 से एक समन्वय व्यवस्था लागू है। इसके तहत सोशल मीडिया पर आत्महत्या से संबंधित पोस्ट की जानकारी मिलने पर मेटा पुलिस महानिदेशक मुख्यालय के सोशल मीडिया सेंटर को अलर्ट भेजता है। सूचना मिलते ही संबंधित व्यक्ति की लोकेशन का पता लगाया जाता है और स्थानीय पुलिस को मौके पर पहुंचने के लिए कहा जाता है।
दो घटनाओं में मिनटों के भीतर पहुंची पुलिस
लखनऊ के सआदतगंज इलाके में हाल ही में 26 वर्षीय डिलीवरी बॉय ने पारिवारिक विवाद से परेशान होकर इंस्टाग्राम पर आत्महत्या से संबंधित वीडियो साझा किया। अलर्ट मिलने के बाद पुलिस ने उसकी लोकेशन ट्रेस की और करीब 10 मिनट में मौके पर पहुंच गई। नदी में कूदने की आशंका के बीच युवक को सुरक्षित किया गया। इसके बाद उसकी काउंसलिंग कराई गई और परिजनों को भी सहयोग के लिए शामिल किया गया।
गाजियाबाद के लिंक रोड क्षेत्र में भी ऐसा ही मामला सामने आया। यहां 24 वर्षीय युवक आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था। उसने इंस्टाग्राम पर आत्महत्या से जुड़ा संदेश पोस्ट किया। पुलिस को सूचना मिली तो टीम आठ मिनट में उसके घर पहुंच गई। कमरे में फंदा मिलने पर पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर युवक को बचाया। बाद में उसे समझाया गया और मानसिक सहयोग दिया गया।
तकनीक के साथ संवेदनशीलता पर जोर
प्रदेश में इस व्यवस्था को तकनीक आधारित पुलिसिंग और जनसुरक्षा के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। इस पहल के लिए यूपी पुलिस को एसकेओसीएच अवॉर्ड-2025 और द इकोनॉमिक टाइम्स जीओवी अवॉर्ड्स-2026 भी मिल चुके हैं। इन मामलों में पुलिस की भूमिका केवल मौके पर पहुंचने तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रभावित व्यक्तियों को मानसिक सहारा देने और परिवार को साथ जोड़ने पर भी जोर दिया गया।