वाराणसी। आज देशभर में इंजीनियर्स डे मनाया जा रहा है। इस मौके पर बनारस पुलिस के पांच ऐसे आईपीएस अफसर चर्चा में हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद वर्दी की राह चुनी। इन अफसरों ने तकनीकी सोच और सटीक विश्लेषण क्षमता के जरिए पुलिसिंग को नए अंदाज में परिभाषित किया है।
देखे लिस्ट
* मोहित अग्रवाल (बैच 1997, पुलिस कमिश्नर)
इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से आने वाले अग्रवाल तकनीकी सूझबूझ के लिए जाने जाते हैं। स्मार्ट पुलिसिंग और हाईटेक सर्विलांस सिस्टम को लेकर उनकी खास पहचान है।
* वैभव कृष्ण (बैच 2010, डीआईजी वाराणसी रेंज)
इंजीनियरिंग के बाद प्रशासनिक सेवा में आए कृष्ण अपनी तार्किक सोच और डेटा-आधारित रणनीति के लिए मशहूर हैं।
* गौरव बंशवाल (बैच 2014, डीसीपी काशी)
बंशवाल का इंजीनियरिंग बैकग्राउंड उन्हें ट्रैफिक और शहरी पुलिसिंग की जटिलताओं को तकनीकी दृष्टि से समझने में मदद करता है।
* सरवरण टी (बैच 2019, डीसीपी क्राइम)
टेक्नोलॉजी और साइबर अपराध पर पकड़ सरवरण टी की सबसे बड़ी ताकत है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई ने उन्हें इस दिशा में अतिरिक्त धार दी है।
* प्रमोद कुमार (बैच 2015, डीसीपी वरुणा)
इंजीनियर से आईपीएस बने प्रमोद कुमार पुलिसिंग में व्यवहारिकता और आधुनिक तकनीकों के प्रयोग के लिए जाने जाते हैं।
पुलिसिंग को बना रहे कारगर
इन सभी अफसरों का मानना है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई ने उन्हें समस्या-समाधान की क्षमता दी, जिसका सीधा लाभ पुलिस सेवा को मिल रहा है। इंजीनियर्स डे पर यह संदेश साफ है कि तकनीकी सोच और अनुशासन का संगम, पुलिसिंग को और भी कारगर बना सकता है।