देर रात IPS अखिल कुमार ने संभाली कानपुर पुलिस कमिश्नर की कमान

कानपुर के नवागंतुक पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने गुरुवार रात को चार्ज ग्रहण कर लिया है। कानपुर पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस कमिश्नर की कमान संभालने वाले आईपीएस अखिल कुमार कानपुर के पांचवें पुलिस कमिश्नर है। चार्ज लेने के बाद आईपीएस अखिल कुमार ने सर्किट हाउस में मीडिया से रूबरू भी हुए।

अपराध और अपराधियों पर प्रभावी प्रहार के लिए मशहूर शहर के नए पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार की प्राथमिकता गरीब और असहाय लोगों को न्याय दिलाना है। उनका कहना है कि पुलिसिंग को बेहतर बनाने के लिए थानों पर फरियादी महिलाओं के प्रति पुलिस के व्यवहार को सुधारने पर प्रमुखता से काम किया जाएगा। बेहतर कानून व्यवस्था में व्यवधान बन रहे अराजक तत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा।उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में बढ़ रहे तकनीक आधारित अपराधों पर प्रभावी लगाम लगाने के लिए आइआइटी से समन्वय स्थापित कर कार्ययोजना तैयार की जाएगी। पुलिस साइबर अपराधों से निपटने के लिए शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संस्थाओं के साथ से तकनीकी सहयोग लेकर इस पर प्रभावी कार्रवाई करेगी। आईपीएस अखिल कुमार ने अपराधों के नए तरीकों के बारे में कहा कि पुलिस टीम के साथ पुराने कार्यों की समीक्षा कर अपराधों पर अंकुश लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि शहर की कानून व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए काम किया जाएगा।बेहतर कानून व्यवस्था में व्यवधान बन रहे अराजक तत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा। शहर की यातायात व्यवस्था और इससे जुड़ी समस्याओं के समाधान पर बोले, ट्रैफिक एक मल्टी डाइमेंशनल मुद्दा है, जिसमें नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, एनएचएआइ, शिक्षा व अन्य विभागों का भी योगदान रहता है।सभी विभागों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर यातायात संबंधी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 इंटेलिजेंस के कार्यभार मे वह कानपुर में रह चुके हैं कानपुर का ट्रैफिक तब भी प्रभावित था इसलिए यातायात को सुगम बनाने, सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और ट्रैफिक की अन्य समस्याओं से निपटने के लिए काबिल अफसर को डीसीपी ट्रैफिक का चार्ज दिया जाएगा इसके साथ ही सभी डीसीपी को अपने जोन में पुलिसिया व्यवस्थाएं बेहतर रखनी होगी  ताकि सभी पीड़ितो की सुनवाई समय पर हो सके उन्होंने कहा कि कानपुर में कोई भी अपराध करेगा तो कोई भी अपराधी व माफिया से किसी प्रकार से बख्शा नहीं जायेगा

UP के बड़े जिलों में SSP के पद पर दमदार पारी खेलने वाले IPS कलानिधि नैथानी बने झांसी के DIG

साल की शुरुआत में एक बार फिर से उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 11 जिलों के पुलिस कप्तानों समेत 16 आईपीएस के तबादले किए हैं। दरअसल, अब दोबारा से जारी हुई लिस्ट में आईपीएस कलानिधि नैथानी को झांसी रेंज का डीआईजी बनाया गया है। आईपीएस कलानिधि हमेशा अपने कार्यों की वजह जाने जाते हैं। वो न तो खुद काम में लापरवाही दिखाते हैं, और ना ही किसी अधीनस्थ को लापरवाही करने देते हैं। ऐसे में झांसी रेंज में जब वो कार्यभार संभालेंगे तो कानून व्यवस्था और भी ज्यादा मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।

कौन हैं आईपीएस कलानिधि नैथानी

जानकारी के मुताबिक, अगर बात करें इनके कार्यकाल की तो 2010 बैच के आईपीएस कलानिधि नैथानी इस तबादला लिस्ट आने से पहले उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे, लेकिन अब उन्हें झांसी का डीआईजी बनाया गया है। वह उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले हैं।उनकी मां कुसुम नैथानी राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हैं। उन्होंने पौड़ी गढ़वाल के सरकारी गर्ल्स कॉलेज और देहरादून के कॉलेज में प्रिंसिपल के तौर पर काम किया है। पिता उमेश चंद्र नैथानी गढ़वाल विश्वविद्यालय से रिटायर्ड प्रोफेसर हैं। दादा भी शिक्षक थे। चाचा सुनील नैथानी आर्मी में एजुकेशन विंग में कर्नल रहे हैैं।

कलानिधि नैथानी को अनुशासनप्रिय और कड़क पुलिस अधिकारी माना जाता है। वह हर जिले में अपनी एक अलग छाप छोड़ने की कोशिश करते हैं। अपनी कार्यशैली की वजह से उन्हें कई बार सम्मानित किया गया है। आईपीएस में चयन के बाद कलानिधि नैथानी पीलीभीत, बरेली, कुंभमेला, सहारनपुर में सहायक पुलिस अधीक्षक, पीएसी की 38वीं और नौवीं वाहिनी में सेनानायक, पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद में पुलिस अधीक्षक, कन्नौज, फतेहपुर, मिर्जापुर और पीलीभीत के पुलिस अधीक्षक के बाद बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर रहे। 2010 बैच के आईपीएस ऑफिसर कलानिधि नैथानी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर गाजियाबाद तक में तैनाती के दौरान अपनी छाप छोड़ी।

जरूरतमंदों को न्याय दिलाना है प्राथमिकता

अगर इनकी प्राथमिकताओं की बात करें तो हर जरूरतमंद को न्याय दिलाना और पुलिस व जनता के बीच बेहतर समन्वय विकसित करना इनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही जनहित में काम करना इन्हें बेहद पंसद आता है। वो अक्सर पुलिसकर्मियों को भी उनका दायित्व याद दिलाते रहते हैं। हमेशा से कानून के दायरे में रहकर ड्यूटी करना और अपराध को नियंत्रित करना इनका मकसद रहा है। वो इसमें सफल भी रहते हैं।

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1996 बैच की IPS सतवंत अटवाल त्रिवेदी बनी हिमाचल की DGP, मिला अतिरिक्त कार्यभार

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक बार फिर तेज तर्रार महिला अफसर पर विश्वास जताया है. साल 1996 बैच की आईपीएस अधिकारी सतवंत अटवाल त्रिवेदी को हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है. मौजूदा वक्त में वे स्टेट विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो की एडीजी हैं. साल 2023 में 23 जून से लेकर 13 जुलाई तक वे पहले भी हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार संभाल चुकी हैं. उस वक्त डीजीपी रहे संजय कुंडू लंबी छुट्टी पर गए थे.

सतवंत अटवाल ने अपनी काबिलियत को किया है साबित

हिमाचल प्रदेश की तेज तर्रार महिला अफसर ने आपदा के दौरान बेहतरीन काम कर अपनी काबिलयत को साबित किया. जब सतवंत अटवाल त्रिवेदी के पास हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक का अतिरिक्त कार्यभार आया, तो उन्होंने कुल्लू, मनाली और मंडी में आई आपदा के दौरान अपनी टीम के साथ बेहतरीन काम कर प्रदेश के साथ देशभर में अपना नाम बनाया. आपदा के दौरान बेहतरीन काम करने का ही तोहफा अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सतवंत अटवाल को दिया है. जानकारों की मानें, तो लंबे वक्त तक सतवंत अटवाल त्रिवेदी के पास ही यह अतिरिक्त कार्यभार रहने वाला है.

हिमाचल हाईकोर्ट ने दिए थे संजय कुंडू को पद से हटाने के आदेश

बता दें कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 26 दिसंबर, 2023 को संजय कुंडू को डीजीपी पद से हटाने के आदेश दिए थे. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि संजय कुंडू को बतौर डीजीपी और शालिनी अग्निहोत्री को बतौर एसपी कांगड़ा वर्तमान पोस्टिंग से हटाया जाना चाहिए. इसके बाद 2 जनवरी की सुबह संजय कुंडू को डीजीपी के पद से हटकर आयुष विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया. शाम होते-होते मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने सतवंत अटवाल त्रिवेदी को हिमाचल प्रदेश का नया पुलिस महानिदेशक बना दिया है.

IPS Arun Mohan Joshi देश के सबसे कम उम्र के IG, 23 साल में बन गए थे IPS

वर्ष 2006 बैच के आईपीएस अरुण मोहन जोशी देश के सबसे कम उम्र (40 साल) के आईजी बन गए हैं। कुछ दिन पहले ही शासन ने उनकी डीपीसी पर मुहर लगाई थी। उत्तराखंड के चकराता निवासी आईपीएस अरुण मोहन जोशी वर्ष 2006 में सबसे कम उम्र (23 साल) में आईपीएस बने थे।

हालांकि, इसके बाद देश में अन्य अफसर कम उम्र में आईपीएस बनने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा चुके हैं। आईजी के मामले में 2004 बैच के आईपीएस गौरव राजपूत वर्ष 2022 में 41 साल की उम्र में देश के सबसे कम उम्र के आईजी बने थे। अब उत्तराखंड कैडर के 2006 बैच के आईपीएस अरुण मोहन जोशी 40 साल की उम्र में आईजी बने हैं।

आईजी अरुण मोहन जोशी की पढ़ाई देहरादून और हरिद्वार में हुई। उनके तीन भाई और एक बहन हैं। आईपीएस बनने से पहले वह आइआइटी रुड़की में इंजीनिय¨रग कर रहे थे।

22 दिसंबर 2023 को संपन्न हुई थी डीपीसी

22 दिसंबर, 2023 को उत्तराखंड सचिवालय में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की डीपीसी संपन्न हुई। डीपीसी में वर्ष 2006 बैच की आईपीएस अधिकारी पुलिस उप महानिरीक्षक स्वीटी अग्रवाल, अरुण मोहन जोशी, अनंत शंकर ताकवाले तथा राजीव स्वरूप को एक जनवरी 2024 से पुलिस महानिरीक्षक पद पर पदोन्नति प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

स्वीटी अग्रवाल के प्रतिनियुक्ति पर होने के कारण उन्हें परफार्मा पदोन्नति प्रदान करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा वर्ष 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी पुलिस अधीक्षक सुखबीर सिंह को एक जनवरी 2024 से पुलिस उप महानिरीक्षक पद पर पदोन्नति प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

वर्ष 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार तथा धीरेंद्र गुंज्याल को एक जनवरी 2024 से सेलेक्शन ग्रेड प्रदान करने का निर्णय लिया गया। सोमवार को पदोन्नति पाने वाले सभी अधिकारियों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में पदोन्नति बैज प्रदान किए।

 

SP सिटी को मीट माफिया से दोस्ती पड़ गई भाई, एक झटके में हो गया तबादला

मेरठ में SP सिटी पीयूष कुमार सिंह का आज तबादला कर सुल्तानपुर PTS कर दिया गया है। उनकी जगह आयूष विक्रम को एसपी सिटी का कार्यभार सौंपा गया है। जहां पीयूष कुमार सिंह का तबादला हुआ है तो वहीं दूसरी तरफ चर्चाओं का बाजार भी इस बात से गर्म चल रहा है कि आईपीएस पीयूष को मीट माफिया से दोस्ती भारी पड़ी गई है, या यह कहना भी गलत न होगा की एक आरोपी से दोस्ती का ही खामियाजा है कि उनका तबादला दूसरे जिले में कर दिया है।

दरअसल आईपीएस पीयूष का सुल्तानपुर PTS तबादला होने की असली वजह मीट माफिया के बेटे से दोस्ती बताई जा रही है। सूत्र की माने तो मीट माफिया की पिस्टल को आईपीएस ने “खिलौने” में बदली थी। असली पिस्टल से एक रेस्त्रां मालिक को धमकाया गया था। मीट माफिया के रेपिस्ट बेटे को बचाने का भी प्रयास किया गया था। मीट माफिया की कई कांडों में सरपरस्ती की गई थी। 2 दिन तक हिंदू युवती से रेपकांड को भी दबाया गया था। SSP के दखल के बाद ही रेप का केस दर्ज हो सका था।

मेरठ शहर में मीट कारोबारी का 500 अवैध मीट दुकानों का संचालन है। मीट माफिया के इशारे पर शहर में अवैध मीट शॉप धडल्ले से चल रही है। भाजपा के एक मंत्री ने मीट माफिया की शिकायत की थी। भाजपा नेता ने इस मामले में खुलकर विरोध भी किया था।

कौन हैं IPS नीना सिंह जिन्होंने CISF की पहली महिला प्रमुख बन रच दिया इतिहास

आईपीएस अधिकारी नीना सिंह को सीआईएसएफ यानी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल का प्रमुख बनाया गया है. खास बात यह है कि नीना सिंह ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) का प्रमुख बन इतिहास रच दिया है, क्योंकि यह कारनामा करने वालीं वह देश की पहली महिला हैं, जो सीआईएसएफ की महिला प्रमुख बनी हैं. आईपीएस अधिकारी नीना सिंह वर्तमान में सीआईएसएफ की विशेष महानिदेशक हैं. सीआईएसएफ के पास पूरे देश में हवाई अड्डों, दिल्ली मेट्रो, सरकारी भवनों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है.

कौन हैं नीना सिंह

नीना सिंह को मणिपुर-कैडर अधिकारी के रूप में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में शामिल किया गया था, लेकिन बाद में वह राजस्थान कैडर में चली गईं. वर्ष 1989 बैच की आईपीएस अधिकारी नीना सिंह इस साल 31 अगस्त को शीलवर्धन सिंह की सेवानिवृत्ति के बाद से सीआईएसएफ महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही हैं. कार्मिक मंत्रालय के एक आदेश में कहा गया है कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने 31 जुलाई, 2024 तक यानी सेवानिवृत्ति की तारीख तक, सीआईएसएफ के महानिदेशक के रूप में नीना सिंह की नियुक्ति को मंजूरी दी है.

सीबीआई में भी कर चुकी हैं काम

दरअसल, नीना सिंह राजस्थान कैडर में आवंटित पहली महिला आईपीएस अधिकारी थीं, जहां उन्होंने राज्य भर में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया. उन्होंने 2013-18 के दौरान सीबीआई में संयुक्त निदेशक के रूप में भी काम किया, जहां उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव वाले कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच की. वह 2021 से सीआईएसएफ में काम कर रही हैं. वह पहले एडीजी के रूप में और फिर स्पेशल डीजी के रूप में और 31 अगस्त 2023 से डीजी प्रभारी के रूप में लगातार सीआईएसएफ में काम कर रही हैं.

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कौन हैं IPS Somendra Meena जिन्हें महराजगंज का बनाया गया नया पुलिस कप्तान

उत्तर प्रदेश कैडर के आपीएस अधिकारी सोमेन्द्र मीणा को महराजगंज जनपद का नया पुलिस कप्तान नियुक्त किया गया है। 32 वर्षीय आईपीएस सोमेन्द्र मीणा इससे पहले यूपी पुलिस में कई जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। महराजगंज के पुलिस अधीक्षक का जिम्मा संभालने से ठीक पहले वे आगरा में पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण के पद पर तैनात रहे हैं।

कौन है महराजगंज के नये एसपी सोमेन्द्र मीणा

1) सोमेन्द्र मीणा वर्ष 2017 बैच के IPS अधिकारी हैं और उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला हुआ है। आईपीएस अफसर के रूप में उनकी पहली नियुक्ति 18 दिसंबर 2017 को हुई थी।

2) 2 जुलाई 1992 को जन्में सोमेन्द्र मीणा मूल रूप से राजस्थान के करौली जिले से हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय सवाई माधोपुर से हुई।

3) उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के किरोड़ीमल कॉलेज से भूगोल में स्नातक की डिग्री ली। डीयू में पढ़ाई के दौरान विभिन्न क्विज प्रतियोगिताओं और ‘मानचित्रों द्वारा भूगोल’ की प्रतियोगिताओं के वे प्रथम विजेता रहे।

4) आईपीएस सोमेंद्र मीणा की पहली तैनाती इंस्पेक्टर, एत्मादपुर थाना, आगरा के रूप हुई। इस पद पर वह यहां 6 महीने तक रहे।

5) वह प्रयागराज में सहायक पुलिस अधीक्षक के तौर पर भी सेवाएं दे चुके हैं।

6) प्रयागराज से प्रोन्नत होकर उनको कानपुर में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त पूर्वी जोन के पद पर पदस्थापित किया गया। जहां उन्होंने गैंगस्टर एक्ट में वांछित आरोपियों पर सख्ती के साथ कार्रवाई की और चोर, लुटेरे, बदमाशों को जेल की सीखचों के पीछे भिजवाया।

7) उनकी तैनाती के दौरान एक बार प्रधानमंत्री कानपुर दौरे पर आये और पीएम का अचानक हेलीकॉप्टर को छोड़ सड़क मार्ग से अगले गंतव्य तक जाना तय हुआ। पीएम के काफिले की जिम्मेदारी अचानक उन पर आ पड़ी। बताया जाता है कि उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार कर बखूबी निभाया।

अपराधियो के खिलाफ सख्ती के लिये चर्चित सोमेन्द्र मीणा को जनपद का जिम्मा ठीक ऐसे वक्त सौंपा गया है, जब महराजगंज में भारत-नेपाल सीमा तस्करों की गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। हाल के दिनों से महराजगंज पुलिस और एसएसबी सीमा पर तस्करी के कई मामलों का पर्दाफाश भी कर चुकी है। ऐसे में सीमा पर चली आ रही तस्करी को रोकना और महराजगंज की कानून व्यवस्था को अव्वल और आदर्श बनाये रखना उनकी सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है।