मेरठ में प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज के मामले ने अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और प्रमुख सचिव (गृह) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग का यह कदम शिकायत मिलने के बाद उठाया गया है, जिसमें पुलिस पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग करने का आरोप लगाया गया है।
आयोग ने जारि किया नोटिस
आयोग की ओर से जारी नोटिस में घटना से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर जवाब तलब किया गया है। डीजीपी से पूछा गया है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस को बल प्रयोग करने की आवश्यकता क्यों पड़ी, उस समय हालात क्या थे और कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि पुलिस ने किस आधार पर लाठीचार्ज का फैसला लिया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यह भी जानना चाहा है कि घटना में कितने लोग घायल हुए, उन्हें किस प्रकार की चोटें आईं और घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई या नहीं। इसके अलावा आयोग ने पूरे घटनाक्रम से संबंधित तथ्यात्मक रिपोर्ट निर्धारित समय में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने अपने नोटिस में जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया है। यदि जांच के दौरान यह सामने आता है कि पुलिस की ओर से नियमों का उल्लंघन हुआ या आवश्यकता से अधिक बल का इस्तेमाल किया गया, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है या भविष्य में की जाएगी, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।
प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
यह मामला एक प्रदर्शन से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें लोग एक हत्या के मामले में न्याय की मांग कर रहे थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने बिना पर्याप्त कारण बल प्रयोग किया। हालांकि, इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अब सभी की नजर उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी है, क्योंकि इसी के आधार पर आयोग आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।