लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 12 दिन तक चली कांवड़ यात्रा मंगलवार को श्रावण शिवरात्रि पर जलाभिषेक के साथ संपन्न हो गई। सावन के पहले दिन 30 जुलाई से शुरू हुई इस यात्रा में करीब साढ़े चार करोड़ कांवड़ियों ने हिस्सा लिया। इतनी बड़ी संख्या में शिवभक्तों के सड़कों पर उतरने के बावजूद प्रदेश में यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती थी। यूपी पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी से यह चुनौती काफी हद तक सफलतापूर्वक पूरी हुई।
इन जिलों में थी धूम
कांवड़ यात्रा के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद और सहारनपुर समेत कई जिलों में कांवड़ियों की भारी भीड़ रही। हरिद्वार और गंगोत्री सहित विभिन्न घाटों से गंगाजल लेकर निकले शिवभक्तों ने निर्धारित मार्गों से अपने गंतव्य तक पहुंचकर शिवालयों में जल चढ़ाया।
यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए मार्गों पर 60 हजार से अधिक पुलिस और सुरक्षा बलों के जवान तैनात किए गए थे। यूपी पुलिस, पीएसी, सीआरपीएफ, एटीएस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवानों ने अलग-अलग मोर्चों पर जिम्मेदारी संभाली। संवेदनशील स्थानों और प्रमुख चौराहों पर 30 हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई, जबकि ड्रोन के जरिए भी लगातार नजर रखी गई।
प्रशासन ने कांवड़ियों की स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया। छह प्रमुख मार्गों पर 18 बाइक एंबुलेंस और 32 स्वास्थ्य शिविर लगाए गए। भीड़भाड़ वाले रास्तों में त्वरित चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए बाइक एंबुलेंस उपयोगी साबित हुईं।
सीएम ने दिए थे निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे। अराजकता और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश के साथ यातायात, स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया गया। कुछ स्थानों पर डीजे और हथियारों को लेकर विवाद की स्थिति बनी, लेकिन पुलिस ने तत्काल कार्रवाई कर स्थिति संभाल ली।
इस तरह 12 दिनों में करीब 4.5 करोड़ कांवड़ियों की भागीदारी वाला विशाल धार्मिक आयोजन सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।