अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज को लेकर एक अहम नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO के पद के लिए मंगलवार से उम्मीदवारों के इंटरव्यू शुरू हो गए। इस पद की दौड़ में उत्तर प्रदेश के पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय का नाम भी शामिल है। पुलिस सेवा में लंबा अनुभव रखने वाले पांडेय का करियर खास तौर पर संगठित अपराध और आतंकवाद के खिलाफ अभियानों के लिए चर्चा में रहा है।
32 साल यूपी पुलिस में दी सेवाएं
राजेश पांडेय ने करीब 32 साल तक उत्तर प्रदेश पुलिस में सेवाएं दीं। उन्होंने 1986 में PPS अधिकारी के तौर पर पुलिस सेवा में प्रवेश किया था और 1989 में DSP बने। वर्ष 2003 में उन्हें प्रमोशन के जरिए IPS कैडर मिला। अपने करियर में उन्होंने लखनऊ, अलीगढ़ और मेरठ जैसे अहम जिलों में SSP की जिम्मेदारी संभाली और बाद में IG स्तर तक पहुंचे।
पांडेय को पुलिस महकमे में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर भी पहचान मिली। उनके नाम 80 से ज्यादा एनकाउंटर बताए जाते हैं। वह उत्तर प्रदेश STF और ATS की शुरुआती टीम का हिस्सा रहे और आतंकवाद तथा संगठित अपराध से जुड़े कई ऑपरेशनों में काम किया।
उनके करियर का सबसे चर्चित अध्याय कुख्यात अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ला के खिलाफ अभियान रहा। पुलिस सेवा के दौरान इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस में भी उनकी विशेषज्ञता बताई जाती रही है।
मिले कई सम्मान
बहादुरी और पुलिस सेवा के लिए पांडेय को कई सम्मान मिले। उन्हें राष्ट्रपति के वीरता पदक चार बार मिले, जबकि कोसोवो में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के दौरान UN Medal से भी सम्मानित किया गया। रिटायरमेंट के बाद भी वह सुरक्षा से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहे और UPEIDA तथा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से संबंधित जिम्मेदारी निभाई।
अब नजर इस बात पर है कि राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी होने के बाद ट्रस्ट किस नाम पर मुहर लगाता है। राजेश पांडेय की पुलिस और प्रशासनिक पृष्ठभूमि उन्हें इस दौड़ में एक चर्चित उम्मीदवार बनाती है।