वाराणसी। महिला थाना कोतवाली में तैनात प्रभारी निरीक्षक सुमित्रा देवी शुक्रवार को एंटी करप्शन टीम के जाल में फंस गईं। आरोप है कि उन्होंने एक मुकदमे में आरोपियों के नाम हटाने के बदले 42 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने योजना बनाकर उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया। मौके पर मौजूद महिला आरक्षी अर्चना को भी टीम ने हिरासत में ले लिया।
रिश्वत की शिकायत पर हुई कार्रवाई
भदोही के जलालपुर निवासी मेराज ने भ्रष्टाचार निरोधक इकाई में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी पारिवारिक शिकायत महिला थाना कोतवाली में दर्ज है। इस केस में 14 लोगों को आरोपी बनाया गया था। मेराज का आरोप था कि थाना प्रभारी ने नाम निकालने के लिए उनसे 42 हजार रुपये की मांग की। वह पहले 10 हजार दे चुका था, जबकि बाकी रकम शुक्रवार को देने की बात तय हुई थी।
शिकायत सही पाए जाने पर एंटी करप्शन टीम ने मेराज के साथ ट्रैप प्लान तैयार किया। तय समय पर मेराज थाना पहुंचे और केमिकल लगे नोट सुमित्रा देवी और महिला आरक्षी अर्चना को दिए। जैसे ही दोनों ने पैसे हाथ में लिए, टीम ने घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया। मौके से बरामद नोटों की गिनती कर उन्हें साक्ष्य के तौर पर जब्त किया गया।
गिरफ्तारी के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को कैंट थाने लाया गया, जहां देर शाम तक उनसे पूछताछ जारी रही। विभागीय सूत्रों के अनुसार, एंटी करप्शन यूनिट ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और कॉल रिकॉर्डिंग भी कब्जे में ली हैं।
कमिश्नरेट में मचा हलचल
महिला थाना प्रभारी की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। कई अधिकारी मामले की जानकारी लेने के लिए एंटी करप्शन यूनिट से संपर्क करते रहे। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पूरे मामले पर आधिकारिक टिप्पणी करने से परहेज किया है।