प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं पर सख्ती बढ़ाते हुए पुलिस मुख्यालय ने नई व्यवस्था लागू की है। अब जिन सड़क हादसों में तीन या उससे अधिक लोगों की मौत होगी, उन्हें “स्पेशल रिपोर्ट केस” के रूप में दर्ज किया जाएगा और उनकी रिपोर्ट सीधे पुलिस मुख्यालय भेजनी अनिवार्य होगी। इस संबंध में डीजीपी राजीव कृष्ण ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि ऐसे मामलों की जांच में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसलिए लिया गया फैसला
दरअसल, समीक्षा में पाया गया कि गंभीर सड़क हादसों की विवेचना में कई बार आवश्यक बिंदुओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे न केवल दोषियों को सजा दिलाने में कठिनाई होती है, बल्कि मृतकों के परिजनों को बीमा दावों के भुगतान में भी दिक्कत आती है। इसी को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जांच अधिकारियों का मार्गदर्शन करें और हर पहलू की गहन जांच सुनिश्चित करें।
जांच के दौरान कुछ अहम बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। इनमें वाहन स्वामी और चालक का सही नाम-पता दर्ज करना, वाहन के बीमा, फिटनेस, प्रदूषण प्रमाणपत्र और रजिस्ट्रेशन की वैधता की जांच शामिल है। साथ ही, वाहन में अवैध मॉडिफिकेशन की स्थिति भी केस डायरी में दर्ज करनी होगी।
इन बातों का रखना पड़ेगा ध्यान
इसके अलावा दुर्घटना के कारणों की पड़ताल—जैसे सड़क की खराब हालत, खतरनाक मोड़ या अवैध कट—भी जरूरी होगी। चालक के नशे में होने की स्थिति में मेडिकल परीक्षण, ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता, ओवरस्पीड और ओवरलोडिंग की जांच भी अनिवार्य की गई है। सीसीटीवी फुटेज खंगालने, सीट बेल्ट और हेलमेट के उपयोग, रांग साइड ड्राइविंग और चालक के नाबालिग होने जैसे पहलुओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में मौतों को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा है, और यह नई पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।