अयोध्या। कार्तिक मास में अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में बुधवार को स्थायी सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। इसमें श्रीराम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा के साथ दीपोत्सव, 14 कोसी व पंचकोसी परिक्रमा और कार्तिक पूर्णिमा स्नान के दौरान व्यवस्था बनाए रखने पर चर्चा हुई।
बैठक में पहुंचे एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार ने राम जन्मभूमि परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने सात नवंबर को प्रस्तावित दसवें दीपोत्सव की तैयारियों का भी जायजा लिया। कार्तिक मास में धार्मिक गतिविधियां बढ़ने के साथ अयोध्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। इसे देखते हुए सुरक्षा प्रबंधों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।
भीड़ और आयोजनों के अनुरूप बनेगी रणनीति
अयोध्या में कार्तिक मास के दौरान कई प्रमुख धार्मिक आयोजन होते हैं। दीपोत्सव के अलावा 14 कोसी और पंचकोसी परिक्रमा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर सरयू स्नान के लिए भी लोगों की भीड़ जुटती है। ऐसे में पुलिस के सामने सुरक्षा के साथ भीड़ और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की चुनौती रहती है।
एडीजी ने कहा कि राम जन्मभूमि की सुरक्षा की समीक्षा के लिए स्थायी सुरक्षा समिति की बैठक नियमित रूप से होती है। इसमें आगामी कार्यक्रमों की जरूरतों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था पर विचार किया जाता है। जरूरत पड़ने पर मौजूदा प्रबंधों में बदलाव भी किए जाते हैं।
तकनीक के साथ स्थानीय सहयोग पर भी जोर
सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। इसके साथ ही स्थानीय नागरिकों का सहयोग और विश्वास बनाए रखने को भी अहम बताया गया। पुलिस प्रशासन का लक्ष्य है कि कार्तिक मास के सभी धार्मिक कार्यक्रम व्यवस्थित ढंग से संपन्न हों और श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो।
दीपोत्सव समेत आगामी आयोजनों को देखते हुए पुलिस प्रशासन तैयारियों में जुटा है। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के जरिए आयोजन के दौरान जरूरी इंतजाम सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।