आगरा। ताजनगरी की पुलिस अब खुद अपनी सफाई में जुट गई है। पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने विभाग के भीतर फैले भ्रष्टाचार पर ऐसा शिकंजा कसा है कि कई वर्दियां डगमगा गईं। इसी क्रम में इंस्पेक्टर क्राइम शैलेंद्र सिंह, दो उपनिरीक्षक और तीन आरक्षियों को निलंबित कर दिया गया, जबकि यूपी 112 में तैनात दो चालक आरक्षी लाइन हाजिर कर दिए गए।
शिकायतों के आधार पर हो रही कार्रवाई
यह कार्रवाई किसी अचानक आए आदेश की नहीं, बल्कि बीते कुछ हफ्तों से चल रहे एक सतर्क अभियान का नतीजा है। पुलिस कमिश्नर ने हाल ही में हेल्पलाइन नंबर 7839860813 शुरू किया था, ताकि जनता सीधे भ्रष्टाचार की शिकायत कर सके। कुछ ही दिनों में इस नंबर पर पांच सौ से ज्यादा कॉल आ गए। शिकायतों में सबसे गंभीर आरोप सिकंदरा, निबोहरा और फतेहाबाद थानों से जुड़े निकले।
प्रारंभिक जांच में तीनों मामलों में रिश्वतखोरी और अनुचित व्यवहार की पुष्टि हुई, जिसके बाद तत्काल एक्शन लिया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शिकायतें ज्यादातर उन मामलों से जुड़ी थीं जहां फरियादियों से मदद के नाम पर रकम मांगी गई थी।
डीसीपी सिटी सोनम कुमार और डीसीपी पूर्वी सैयद अली अब्बास ने जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद कमिश्नर दीपक कुमार ने स्पष्ट संदेश दिया—जो भी पुलिसकर्मी ईमानदारी की रेखा लांघेगा, उसे वर्दी उतारनी पड़ेगी।
दिए गए निर्देश
अब कमिश्नरेट के तीनों जोन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि डिजिटल सबूत मिलने पर तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाए और दोषी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जेल भेजा जाए।
आगरा पुलिस के इस अभियान ने पूरे प्रदेश में चर्चा छेड़ दी है। वर्दी पर दाग़ मिटाने की इस मुहिम से न सिर्फ तंत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि जनता को भी यह भरोसा मिलेगा कि अब पुलिस के भीतर भी साफ-सफाई शुरू हो चुकी है।