उत्तर प्रदेश में डीजीपी पद पर स्थायी नियुक्ति की राह में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा द्वारा संभावित स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने की अटकलों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि इससे कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण को स्थायी डीजीपी बनाए जाने का रास्ता साफ हो सकता है।
रेणुका मिश्रा ले सकती हैं वीआरएस
रेणुका मिश्रा 1990 बैच की वरिष्ठ अधिकारी हैं और वर्ष 2024 के मार्च से ही बिना किसी ठोस तैनाती के वेटिंग में हैं। सूत्रों के अनुसार, वह इस माह के अंत तक वीआरएस लेने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं।
भर्ती घोटाले के बाद उन्हें हटाया गया था और डीजीपी मुख्यालय से अटैच कर दिया गया, जबकि आमतौर पर डीजी स्तर के अधिकारियों को इस तरह की अटैचमेंट नहीं दी जाती।
वर्तमान में डीजीपी पद के लिए यूपीएससी को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया अधर में है। कारण यह है कि केवल उन्हीं अफसरों के नाम भेजे जा सकते हैं जिनकी सेवा अवधि कम से कम छह महीने शेष हो।
वर्तमान में चार अफसर—रेणुका मिश्रा, आलोक शर्मा, पीयूष आनंद और राजीव कृष्ण—इस श्रेणी में आते हैं। यदि रेणुका वीआरएस ले लेती हैं, तो राजीव कृष्ण की स्थिति और मजबूत हो जाएगी, क्योंकि वह फिर टॉप-3 में आ जाएंगे।
राजीव कृष्ण हैं कार्यवाहक डीजीपी
राजीव कृष्ण 1991 बैच के आईपीएस हैं और वर्तमान में कार्यवाहक डीजीपी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वह इससे पहले विजिलेंस और पुलिस भर्ती बोर्ड के प्रमुख रह चुके हैं। डीजीपी के स्थायी पद पर अंतिम नियुक्ति मई 2022 में मुकुल गोयल की हुई थी। उसके बाद से अब तक पांच कार्यवाहक डीजीपी बन चुके हैं।