Jhansi: आखिरी दिन थाने से निकले तो छलक पड़े आंसू, 40 साल की सेवा के बाद दारोगा की भावुक विदाई

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झांसी। थाने में ढोल-नगाड़े बज रहे थे, साथी पुलिसकर्मी आसपास खड़े थे और एक पुलिसकर्मी को सम्मान के साथ विदा किया जा रहा था। माहौल में खुशी भी थी, लेकिन कुछ ही देर में यही विदाई भावुक हो गई। करीब 40 साल तक पुलिस विभाग में सेवा देने वाले दारोगा रामचंद्र जब समथर थाने से आखिरी बार बाहर निकलने लगे तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

लोग हुए भावुक

रामचंद्र के लिए यह सिर्फ नौकरी का आखिरी दिन नहीं था। यह उस जगह और उन साथियों से विदाई का पल था, जिनके साथ उन्होंने अपने जीवन के करीब चार दशक गुजारे। लंबे पुलिस करियर में अलग-अलग जगहों पर ड्यूटी करते हुए उन्होंने कई तरह की परिस्थितियां देखीं। लेकिन रिटायरमेंट के दिन उन्होंने अपने पूरे सफर को कुछ शब्दों में समेट दिया।

विदाई समारोह में रामचंद्र ने कहा कि पुलिस की नौकरी में उन्हें खुशी के साथ मुश्किल दौर भी देखने पड़े। हर परिस्थिति में जिम्मेदारी निभाने की कोशिश की। उनके मुताबिक, सबसे अहम बात यह रही कि ड्यूटी के दौरान किसी निर्दोष के साथ गलत न हो।

उनकी इस बात में चार दशक की पुलिस सेवा का अनुभव साफ दिखाई दिया। अपराध और विवाद से जुड़े मामलों में ड्यूटी करने से लेकर लोगों की शिकायतों और समस्याओं से सामना होने तक, पुलिस सेवा उनके जीवन का अहम हिस्सा रही।

समथर थाने में साथी पुलिसकर्मियों ने उनके सम्मान में विदाई कार्यक्रम रखा। उन्हें फूल-मालाएं पहनाई गईं और ढोल-नगाड़ों के साथ थाने से रवाना किया गया। लेकिन जैसे ही विदाई का वक्त आया, रामचंद्र भावुक हो गए। साथी पुलिसकर्मी उन्हें संभालते नजर आए।

पुलिसकर्मियों ने दिया गाड़ी को धक्का

विदाई का एक और दृश्य भी सामने आया, जिसमें पुलिसकर्मी उनकी गाड़ी को धक्का देकर थाने से रवाना करते दिखाई दिए। आसपास मौजूद साथियों के बीच यह पल उनके लंबे पुलिस सफर का आखिरी पड़ाव बन गया।

करीब चार दशक तक वर्दी में जिम्मेदारी निभाने के बाद रामचंद्र अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। थाने से उनकी आखिरी रवानगी के दौरान बजते ढोल और साथियों की मौजूदगी के बीच उनकी आंखों से निकले आंसू उस लंबे सफर की भावनात्मक विदाई बन गए।

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