यूपी पुलिस के ‘स्पेशल 32’ संभालेंगे मोर्चा, वैज्ञानिक जांच से थर-थर कांपेंगे अपराधी

Share This

 

उत्तर प्रदेश में अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए योगी सरकार ने नया मास्टर प्लान तैयार किया है। अब जांच सिर्फ बयान और पूछताछ पर नहीं, बल्कि साइंस पर टिकी होगी। इसके लिए यूपी पुलिस के 32 चुनिंदा अफसरों को ‘स्पेशल 32’ के नाम से तैयार किया जा रहा है। ये अफसर क्राइम सीन का एक-एक सुराग वैज्ञानिक तरीके से जुटाएंगे ताकि अपराधी कोई भी चाल चलकर बच न सके।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह कवायद शुरू की गई है। सरकार का मानना है कि घटनास्थल पर मिले छोटे से छोटा साक्ष्य भी बड़े अपराध का खुलासा कर सकता है, बशर्ते उसे सही तरीके से सुरक्षित रखा जाए। इसी सोच के साथ लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में इन 32 अफसरों की मास्टर ट्रेनिंग चल रही है।

600 में से चुने गए टॉप 32 अफसर

दरअसल, इससे पहले पुलिस के 600 अधिकारियों को 6 बैच में 100-100 की संख्या में 40 दिन की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इन अधिकारियों ने ट्रेनिंग के बाद अपने-अपने जिलों में अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित किया। अब इन 600 में से जो टॉप 32 अफसर रहे हैं, उन्हें ही ‘स्पेशल 32’ के लिए चुना गया है। इन्हें फॉरेंसिक साइंस और क्राइम सीन मैनेजमेंट में एक्सपर्ट बनाया जा रहा है।

UPSIFS के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि इस बार ट्रेनिंग थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल पर आधारित है। अधिकारियों के लिए कृत्रिम क्राइम सीन यानी नकली घटनास्थल बनाए जा रहे हैं, जहां दिन और रात दोनों समय में जांच कैसे करनी है, इसकी प्रैक्टिस कराई जा रही है।

इस मास्टर ट्रेनिंग में क्राइम सीन को सील करना, तलाशी और जब्ती के नियम, क्राइम सीन नोट्स बनाना, फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी, फिंगरप्रिंट उठाना, खून के धब्बों और बाल जैसे माइक्रो साक्ष्यों को सुरक्षित रखना सिखाया जा रहा है। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि कैसे अपराधी साक्ष्य मिटाने या गुमराह करने की कोशिश करते हैं और उस स्थिति में पुलिस को क्या करना चाहिए।

75 जिलों में मजबूत होगी जांच

इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा फायदा प्रदेश के सभी 75 जिलों को मिलेगा। ये स्पेशल 32 अफसर मास्टर ट्रेनर बनेंगे और आगे चलकर जिलों में तैनात पुलिसकर्मियों को क्राइम सीन मैनेजमेंट की ट्रेनिंग देंगे। इससे हर जिले में वैज्ञानिक जांच की क्षमता बढ़ेगी और चार्जशीट मजबूत होगी, जिससे कोर्ट में अपराधियों को सजा दिलाना आसान होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *