लखनऊ अग्निकांड मामले में निलंबित खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिकारी (FSSO) कमलेंद्र सिंह पहले अपने वायरल वीडियो को लेकर चर्चा में आए, जिसमें उन्होंने कार्रवाई और जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल उठाए थे। हालांकि अब वह अपने उस बयान से पीछे हटते नजर आ रहे हैं। कमलेंद्र सिंह ने कहा है कि उनका वायरल वीडियो भ्रमित करने वाले तरीके से बनवाया गया था और उस समय वह हादसे में 15 लोगों की मौत से बेहद आहत और मानसिक रूप से व्यथित थे।
अब कहा ये
कमलेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्हें अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर पूरा भरोसा है और मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी। उन्होंने कहा कि उनका किसी अधिकारी या विभाग पर आरोप लगाने का कोई इरादा नहीं था। साथ ही वायरल वीडियो को लेकर उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है।
हालांकि इससे पहले कमलेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक खुली चिट्ठी लिखकर अपने निलंबन का विरोध किया था। उन्होंने दावा किया था कि इस हादसे में उनके जैसे छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि उनकी जिम्मेदारी सीमित है। चिट्ठी में उन्होंने कहा था कि उनके पास किसी भी भवन को फायर क्लियरेंस देने या बड़े स्तर पर सुरक्षा मानकों को लागू कराने का अधिकार नहीं है।
पहले उठाए थे सवाल
कमलेंद्र सिंह ने अपनी चिट्ठी में लखनऊ के मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जिस इमारत में आग लगी, उसका वर्षों से कथित तौर पर अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था, जबकि उसे आवासीय भवन के रूप में मंजूरी मिली थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि आग बुझाने में हुई देरी सीएफओ की लापरवाही को दर्शाती है।
अब अपने नए बयान में कमलेंद्र सिंह ने किसी पर आरोप लगाने से इनकार करते हुए जांच प्रक्रिया पर भरोसा जताया है। ऐसे में उनके पहले के आरोपों और मौजूदा सफाई को लेकर मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।