डिप्टी एसपी की ट्रेनिंग में बड़ा बदलाव, अब पुलिस-प्रशासन के बीच तालमेल भी सीखेंगे

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मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश में डिप्टी एसपी बनने वाले अधिकारियों की ट्रेनिंग का तरीका अब बदलने जा रहा है। डॉ. भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादमी में 16 अगस्त से 17 डिप्टी एसपी का प्रशिक्षण शुरू होगा। खास बात यह है कि पहली बार इन्हें पुलिस अकादमी से बाहर लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में दो महीने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यहां सिविल सेवा के अधिकारियों के साथ उन्हें कामकाज और आपसी समन्वय की ट्रेनिंग मिलेगी।

जानें क्या है बदलाव

नई व्यवस्था के तहत डिप्टी एसपी का पूरा प्रशिक्षण अब 22 महीने का होगा। पहले यह अवधि करीब 18 महीने थी। 16 अगस्त को मुरादाबाद पहुंचने वाले 17 अधिकारियों को 22 अगस्त को लखनऊ भेजा जाएगा। दो महीने का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे वापस मुरादाबाद आएंगे और यहां 13 महीने का प्रशिक्षण लेंगे।

इसके बाद अधिकारियों को छह महीने की फील्ड ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। फील्ड से लौटने के बाद उन्हें एक महीने का अंतिम प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद पासिंग आउट परेड होगी और मुख्यालय स्तर से उनकी तैनाती की जाएगी।

अधिकारियों के मुताबिक, सिविल प्रशासन के साथ शुरुआती प्रशिक्षण का फायदा डिप्टी एसपी को फील्ड में मिलेगा। अलग-अलग विभागों के साथ काम करते समय समन्वय की जरूरत होती है। प्रशिक्षण के दौरान ही इसका व्यावहारिक अनुभव मिलने से पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल की उम्मीद है।

दारोगाओं को सिखाई जाएगी क्रिप्टो मामलों की जांच

दूसरी ओर, यूपी पुलिस के नए दारोगाओं के प्रशिक्षण में क्रिप्टो करेंसी से जुड़े अपराधों की जांच को भी शामिल किया गया है। चार हजार से अधिक नवनियुक्त दारोगाओं का प्रशिक्षण जल्द शुरू होने वाला है। उन्हें क्रिप्टो से जुड़े मामलों में जांच की बुनियादी प्रक्रिया और इस्तेमाल होने वाले तरीकों की जानकारी दी जाएगी।

प्रशिक्षकों को इसके लिए पहले से तैयार किया गया है। जरूरत के अनुसार ईडी, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों की मदद भी ली जाएगी। डीजी ट्रेनिंग राजीव सभरवाल के अनुसार, बदलते अपराधों के अनुरूप पुलिस के प्रशिक्षण में भी लगातार बदलाव किया जा रहा है।

 

 

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