उत्तर प्रदेश पुलिस को करीब चार साल के लंबे इंतजार के बाद स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) मिलने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण को प्रदेश का नया स्थायी डीजीपी नियुक्त किया जा सकता है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से राज्य सरकार को भेजे गए पैनल में उनका नाम शामिल है और अंतिम निर्णय जल्द होने की उम्मीद है।
कौन हैं राजीव कृष्ण
1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण फिलहाल उत्तर प्रदेश पुलिस की कमान संभाल रहे हैं। उन्होंने 1 जून 2025 को कार्यवाहक डीजीपी का पदभार ग्रहण किया था। पुलिस प्रशासन में लंबे अनुभव और विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं देने के कारण उन्हें इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
राजीव कृष्ण का पुलिस सेवा में सफर तीन दशक से अधिक लंबा रहा है। आईपीएस बनने के बाद उनकी शुरुआती तैनाती प्रयागराज में प्रशिक्षु अधिकारी के रूप में हुई थी। इसके बाद उन्होंने बरेली, कानपुर और अलीगढ़ में एएसपी के रूप में काम किया। वर्ष 1997 में उन्हें पहली बार जिले की कमान मिली और वह फिरोजाबाद के पुलिस अधीक्षक बनाए गए।
अपने करियर के दौरान उन्होंने इटावा, मथुरा, फतेहगढ़, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, आगरा, लखनऊ और बरेली जैसे महत्वपूर्ण जिलों में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इसके अलावा मेरठ रेंज के आईजी, लखनऊ और आगरा जोन के एडीजी समेत कई अहम पदों पर भी तैनात रहे। वर्ष 2012 में वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए और 2017 में उत्तर प्रदेश लौटने के बाद फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
राजीव कृष्ण का प्रशासनिक और पारिवारिक बैकग्राउंड भी काफी मजबूत माना जाता है। उनकी पत्नी भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की अधिकारी हैं और वर्तमान में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी प्रशासनिक और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिकाओं में रहे हैं।
जानें कब तक रहेंगे डीजीपी
यदि राजीव कृष्ण को स्थायी डीजीपी नियुक्त किया जाता है तो सुप्रीम कोर्ट और यूपीएससी की गाइडलाइन के अनुसार उनका कार्यकाल कम से कम दो वर्ष का होगा। ऐसे में वह जून 2029 तक प्रदेश पुलिस की कमान संभाल सकते हैं। कार्यवाहक डीजीपी के रूप में बिताए गए एक वर्ष को जोड़कर देखा जाए तो वह हाल के वर्षों में सबसे लंबे समय तक उत्तर प्रदेश पुलिस का नेतृत्व करने वाले अधिकारियों में शामिल हो सकते हैं।
प्रदेश में मई 2022 के बाद से स्थायी डीजीपी का पद खाली है। ऐसे में राजीव कृष्ण की संभावित नियुक्ति को उत्तर प्रदेश पुलिस नेतृत्व में स्थिरता और निरंतरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।