उत्तर प्रदेश की चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (सीसीएसयू) गढ़ रोड परिसर में भगवान परशुराम के जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित जुलूस के दौरान डिप्टी एसपी शुचिता सिंह का बयान चर्चा में आ गया है। जुलूस में शामिल युवकों के हाथ में डंडे और फरसे थे, जिससे डिप्टी एसपी भड़क गईं और उन्होंने हाथ में माइक लेकर जुलूस रोक दिया।
डिप्टी एसपी ने कहा ये
वीडियो में देखा जा सकता है कि डिप्टी एसपी शुचिता सिंह युवाओं को चेतावनी देते हुए कह रही हैं, “ये जो ऊपर बैठे हैं, फरसा लहरा रहे हैं, डंडा लिए हुए हैं, सबकी फोटोग्राफी हो रही है। सब पर मुकदमा लिखा जाएगा। जितने भी डंडे हैं, उन्हें अलग कराओ।” उनके इस बयान पर ब्राह्मण समाज में रोष है। सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं और कुछ इसे ब्राह्मण विरोधी भी बता रहे हैं।
जुलूस भगवान परशुराम के जन्मोत्सव के अवसर पर ब्राह्मण संगठनों सहित अन्य संस्थाओं की ओर से निकाला गया था। सीसीएसयू गेट से शौर्य यात्रा की शुरुआत हुई, जिसमें विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत किया गया। युवाओं के हाथ में फरसे और डंडे होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से डिप्टी एसपी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जुलूस को रोक दिया।
अफसरों ने कहा ये
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि डिप्टी एसपी का मुख्य उद्देश्य शांति बनाए रखना और किसी अप्रिय घटना को रोकना था। हालांकि, उनका हाथ में माइक लेकर लोगों को धमकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा के नाम पर अधिकारियों की कार्रवाई और शब्दों का चयन संवेदनशील हो सकता है, और इससे समाज में असंतोष भी पैदा हो सकता है।