वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट में जल्द ही बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है। खराब प्रदर्शन करने वाले थाना प्रभारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है, जबकि बेहतर कार्य करने वाले दारोगाओं के लिए पदोन्नति के रास्ते खुलते नजर आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यदि वर्तमान थानेदार अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाए तो उनकी कुर्सी छिन सकती है।
पुलिस कमिश्नर ने कहा ये
दरअसल, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल पहले ही संकेत दे चुके हैं कि युवा और ऊर्जावान पुलिसकर्मियों को जिम्मेदारी देने पर जोर दिया जाएगा। इसी कड़ी में 2019 बैच के दारोगा अब थानाध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल हो गए हैं। नियमों के अनुसार, दारोगा को थानाध्यक्ष बनने के लिए कम से कम 6 वर्ष का अनुभव जरूरी होता है, जिसे यह बैच अब पूरा कर चुका है।
जानकारी के मुताबिक, पिछले करीब छह महीनों से दारोगाओं की कार्यप्रणाली, अनुशासन और अपराध नियंत्रण में उनकी भूमिका का गहन मूल्यांकन किया जा रहा है। इसी आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है। जिन अधिकारियों ने अपने काम से बेहतर छाप छोड़ी है, उन्हें जल्द ही थानों की कमान सौंपी जा सकती है।
हालांकि, इस प्रक्रिया में कुछ ऐसे दारोगा भी सामने आए हैं जिनका रिकॉर्ड विवादों से जुड़ा रहा है। एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई में पकड़े गए या विभागीय छवि को नुकसान पहुंचाने वाले अधिकारियों को इस दौड़ से बाहर रखा जा सकता है।
थानों में दिखेंगे नए चेहरे
पुलिस कमिश्नरेट का मानना है कि नई पीढ़ी के दारोगाओं को मौका देने से पुलिसिंग में सुधार होगा और अपराध नियंत्रण पर सकारात्मक असर पड़ेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में वाराणसी के कई थानों में नए चेहरे नजर आ सकते हैं, जिससे पुलिस व्यवस्था में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है।