आरा। भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब कार्रवाई की दिशा पुलिसकर्मियों की ओर मुड़ गई है। मृतक की मां आशा देवी की शिकायत के आधार पर जगदीशपुर के एसडीपीओ और शाहपुर के निलंबित थानाध्यक्ष राजेश मालाकर समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इस कदम के बाद मामले की जांच और तेज हो गई है।
परिजनों ने लगाया था आरोप
परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिया था, लेकिन इसके बावजूद उस पर गोलियां चलाई गईं। शिकायत में कहा गया है कि उसे कई गोलियां लगीं, जिससे उसकी मौत हो गई। परिवार ने इसे एनकाउंटर नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या बताया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस मुख्यालय ने भी जांच शुरू कराई थी। जांच में पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। सूत्रों के मुताबिक, अभियुक्त की निगरानी और उसे नियंत्रित करने में कई स्तरों पर लापरवाही सामने आई है। इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी की मौत हुई थी। पुलिस ने उस समय दावा किया था कि वह फायरिंग कर रहा था और जवाबी कार्रवाई में घायल हुआ। हालांकि घटना से जुड़े वीडियो और परिजनों के आरोपों ने पूरे घटनाक्रम को विवादों में ला दिया।
अफसरों ने किया साफ
बढ़ते दबाव के बीच बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ किया है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब इस मामले में पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।