कासगंज के पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह की पहल इस बात का उदाहरण है कि प्रशासनिक सख्ती के साथ मानवीय संवेदनाएं भी उतनी ही जरूरी हैं। पुलिस की नौकरी ऐसी है, जहां ड्यूटी का कोई तय समय नहीं होता। दिन हो या रात, त्योहार हो या पारिवारिक खुशी, पुलिसकर्मी अक्सर अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में अपने जन्मदिन, शादी की सालगिरह या बच्चों के खास दिन परिवार के साथ बिताने का अवसर मिलना निश्चित तौर पर बड़ी राहत है।
इसलिए लिया गया फैसला
यह फैसला सिर्फ छुट्टी देने का आदेश नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को समझने वाली सोच है। लगातार तनाव और व्यस्तता के बीच परिवार से दूरी कई बार व्यक्ति के मनोबल को प्रभावित करती है। जब विभाग अपने कर्मचारियों की निजी खुशियों को भी महत्व देता है, तो इससे उनके भीतर सम्मान और अपनापन बढ़ता है।
इसलिए खास है ये पहल
एसपी ओपी सिंह की यह पहल इसलिए भी खास है क्योंकि पुलिसकर्मी अक्सर दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करते-करते अपनी निजी जिंदगी के अहम पल खो देते हैं। ऐसे में यह निर्णय उन्हें यह एहसास दिलाता है कि उनकी खुशियां भी मायने रखती हैं।
अगर पुलिस बल को संवेदनशील और प्रभावी बनाना है तो ऐसे मानवीय फैसले जरूरी हैं। कासगंज से शुरू हुई यह पहल दूसरे जिलों के लिए भी मिसाल बन सकती है।