कुशीनगर में अब थाना और चौकी की कमान पाने के लिए सिर्फ वरिष्ठता या पहले के अनुभव पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने दारोगा और इंस्पेक्टरों की क्षमता परखने के लिए एक अलग प्रक्रिया शुरू की। जिन पुलिसकर्मियों को लगता था कि उनमें थाना या चौकी संभालने की योग्यता है, लेकिन उन्हें अब तक मौका नहीं मिला, उनसे आवेदन मांगे गए।
इस पहल के बाद जिले से कुल 25 पुलिसकर्मियों ने अपनी दावेदारी पेश की। आवेदनों की जांच के बाद लिखित परीक्षा कराई गई और फिर साक्षात्कार के जरिए उनकी क्षमता परखी गई। परीक्षा में ऐसे सवाल रखे गए, जो थाना और चौकी प्रभारी की रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के साथ-साथ आपात स्थिति में लिए जाने वाले फैसलों से जुड़े थे।
इस प्रक्रिया में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छह पुलिसकर्मियों को थानों की जिम्मेदारी दी गई, जबकि चार को चौकी प्रभारी बनाया गया। अमित सिंह, महेश चौबे, अरुण सिंह, महेंद्र, धर्मेंद्र सिंह और स्वतंत्र सिंह को थानेदार बनाया गया है। वहीं ब्रह्म उपाध्याय, राम प्रवेश सिंह, अनुराग यादव और शिवम द्विवेदी को चौकी की कमान सौंपी गई है।
एक महिला दारोगा परीक्षा में सफल, लेकिन प्रभार नहीं मिला
इस पूरी प्रक्रिया में एक महिला दारोगा ने भी आवेदन किया था। वह परीक्षा और इंटरव्यू दोनों में सफल रहीं। हालांकि, उनके पुराने जिले से सेवा संबंधी पत्रावली कुशीनगर पुलिस कार्यालय को अभी तक नहीं मिली है। इसी वजह से उन्हें फिलहाल थाना या चौकी का प्रभार नहीं दिया जा सका।
एसपी केशव कुमार के मुताबिक, इस प्रक्रिया का मकसद पुलिसकर्मियों को अपनी क्षमता साबित करने का समान अवसर देना है। इससे विभाग के भीतर पारदर्शिता बढ़ेगी और उन पुलिसकर्मियों की शिकायत भी दूर होगी, जिन्हें लगता है कि योग्य होने के बावजूद उन्हें जिम्मेदारी नहीं मिल रही है।
पुलिस अधीक्षक ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी इसी तरह की प्रक्रिया जारी रखी जा सकती है। यानी आने वाले समय में कुशीनगर में थाना और चौकी प्रभारी चुनने में परीक्षा और योग्यता को भी अहम आधार बनाया जा सकता है।