योगी सरकार में पुलिस हुई हाईटेक, बजट से लेकर थानों तक सब कुछ बढ़ा

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लखनऊ में पुलिस स्मृति दिवस पर सरकार ने आंकड़ों के साथ बताया कि बीते 9 साल में पुलिस विभाग की तस्वीर कैसे बदली है।

देखें आंकड़े

सबसे बड़ा बदलाव बजट में दिखा है। साल 2017-18 में जहां पुलिस के लिए 16 हजार 280 करोड़ रुपये मिलते थे, वहीं अब 2026-27 में यही बजट बढ़कर 43 हजार 891 करोड़ के पार पहुंच गया है। लगभग पौने तीन गुना की छलांग।

पैसे के साथ-साथ गाड़ियों और हथियारों पर भी खर्च बढ़ा है। वाहनों की खरीद के लिए जो बजट पहले 126 करोड़ था, वह अब 627 करोड़ से ज्यादा हो गया है, यानी 5 गुना वृद्धि। उपकरणों के लिए भी 266 करोड़ से बढ़ाकर 734 करोड़ रुपये कर दिया गया है। आधुनिकीकरण के नाम पर अलग से 112 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

भर्तियों का ग्राफ भी तेजी से ऊपर गया है। 2017 से अब तक 2.26 लाख से ज्यादा जवान भर्ती हो चुके हैं और करीब 36 हजार पदों पर भर्ती चल रही है। अंदर के लोगों को भी फायदा मिला है, 1.56 लाख कर्मचारियों का प्रमोशन हुआ है और 9 हजार से ज्यादा का प्रमोशन प्रोसेस में है। नई जरूरतों के लिए 32,497 नए पद भी बनाए गए हैं।

थानों का नेटवर्क भी बड़ा किया गया है। प्रदेश में 134 नए थाने, 7 महिला थाने और 95 चौकियां खुली हैं। नदियों वाले जिलों अयोध्या, मिर्जापुर, चंदौली और सिद्धार्थनगर में 4 जल पुलिस चौकियां बनी हैं। महिलाओं की मदद के लिए 78 परामर्श केंद्र 75 जिलों में खोले गए हैं।

अब अपराध भी बदल गए हैं तो पुलिस भी बदली है। साइबर ठगों से निपटने के लिए 73 अलग साइबर थाने बनाए गए हैं और तो और, हर थाने में एक साइबर हेल्प डेस्क जरूरी की गई है। मानव तस्करी रोकने को 40 थाने, आर्थिक अपराध के 4, एटीएस के 6 और विजिलेंस के 10 थाने बनाए गए हैं। बिजली चोरी रोकने के लिए तो हर जिले में एक अलग थाना खोलने की मंजूरी दे दी गई है।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ाया गया पैसा

इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी पैसा बहा है। इस साल 166 भवन प्रोजेक्ट के लिए 783 करोड़ मंजूर हुए हैं और 821 करोड़ के 123 प्रोजेक्ट पूरे करके पुलिस को सौंप भी दिए गए हैं। इनमें थाने, बैरक, फायर स्टेशन और फोरेंसिक लैब शामिल हैं। साथ ही 6 जिलों में स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स और 3 जिलों में महिला पीएसी वाहिनी भी तैनात की गई है।

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