श्रावण मास की कांवड़ यात्रा में इस बार हापुड़ पुलिस की भूमिका बदले हुए अंदाज में नजर आएगी। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था संभालने के साथ पुलिसकर्मी जरूरत पड़ने पर शिवभक्तों की कांवड़ को भी अपने कंधों पर उठाकर उनकी मदद करेंगे। पुलिस का यह कदम श्रद्धालुओं की आस्था और सुविधा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में शिवभक्त हरिद्वार और गढ़मुक्तेश्वर के ब्रजघाट से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हैं। इनमें से अधिकांश कांवड़िए धार्मिक मान्यता के चलते अपनी कांवड़ को जमीन पर नहीं रखते। लंबी दूरी की यात्रा में जब किसी कांवड़िए को आराम करने या किसी जरूरी काम से रुकना पड़ता है, तब कांवड़ संभालना चुनौती बन जाता है। इसी स्थिति को देखते हुए पुलिस ने सेवा भाव के साथ सहयोग करने का निर्णय लिया है।
एसपी ने दिए निर्देश
पुलिस अधीक्षक कुंवर ज्ञानंजय सिंह ने सभी थाना प्रभारियों और ड्यूटी में लगे जवानों को निर्देश दिए हैं कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के साथ सम्मान और संवेदनशीलता से व्यवहार किया जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाना भी जिम्मेदारी है। जरूरत पड़ने पर पुलिसकर्मी कांवड़ियों की हर संभव सहायता करेंगे।
हापुड़ से होकर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों के शिवभक्त गुजरेंगे। इसे देखते हुए जिले के प्रमुख मार्गों, पड़ाव स्थलों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहेगा।
920 डिजिटल वालंटियर तैयार
वहीं, यात्रा के दौरान अफवाहों पर रोक लगाने और बेहतर समन्वय के लिए पुलिस ने 920 डिजिटल वालंटियर तैयार किए हैं। इनमें शिक्षक, पत्रकार, अधिवक्ता, चिकित्सक, सामाजिक कार्यकर्ता, सेवानिवृत्त सैनिक और धार्मिक संगठनों से जुड़े लोग शामिल हैं। ये वालंटियर सोशल मीडिया पर नजर रखेंगे और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत पुलिस तक पहुंचाएंगे।
हापुड़ पुलिस की यह व्यवस्था सुरक्षा के साथ-साथ सेवा और सहयोग की भावना को भी मजबूत करने का प्रयास है। कांवड़ यात्रा में खाकी अब सिर्फ व्यवस्था संभालती नहीं, बल्कि जरूरत के समय श्रद्धालुओं का सहारा भी बनेगी।