गोरखपुर बालिका हत्याकांड की जांच में पुलिस के हाथ ऐसे तथ्य लगे हैं, जिन्होंने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान बर्खास्त सिपाही अभिषेक यादव ने पूछताछ में बताया कि वह वारदात के दिन अचानक गुस्से में नहीं आया था, बल्कि पुलिस लाइन स्थित अपने कमरे से पहले ही धारदार बांका लेकर निकला था। उसने स्वीकार किया कि उसकी मंशा किसी महिला या बच्ची को निशाना बनाने की थी।
अफसरों ने दी जानकारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी को रिमांड पर लेकर सबसे पहले उस स्थान पर ले जाया गया, जहां से उसने 10 वर्षीय बच्ची को अपनी बाइक पर बैठाया था। इसके बाद उसे घटनास्थल और शव मिलने वाली जगह पर ले जाकर पूरे घटनाक्रम को दोहराने के लिए कहा गया। शुरुआत में वह सवालों से बचता रहा, लेकिन बाद में उसने पूरी घटना स्वीकार कर ली।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि बच्ची के शोर मचाने पर उसे लगा कि लोग इकट्ठा हो जाएंगे और वह पकड़ा जाएगा। इसी डर से उसने पहले बच्ची का गला दबाया और फिर साथ लाए बांके से हमला कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद पहचान छिपाने और सबूत मिटाने की नीयत से शव को बुरी तरह क्षत-विक्षत कर नदी में फेंक दिया।
आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया बांका भी बरामद कर लिया है। अब फोरेंसिक जांच के जरिए हथियार से जुड़े वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जाएंगे। वहीं, जांच टीम यह पता लगाने में भी जुटी है कि आरोपी ने यह धारदार हथियार कहां से खरीदा था और क्या उसने वारदात की तैयारी पहले से कर रखी थी।
पहले भी लगे थे आरोप
इस बीच पुलिस ने अभिषेक यादव के आपराधिक रिकॉर्ड को भी खंगालना शुरू कर दिया है। जांच में सामने आया है कि उसके खिलाफ पहले भी एक युवती के अपहरण, छेड़छाड़ और मारपीट का मामला दर्ज है। पुलिस अब उस केस में भी मजबूत पैरवी कर आरोपी को कड़ी सजा दिलाने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि पूर्व नियोजित साजिश के पर्याप्त साक्ष्य मिले, तो उन्हें भी विवेचना का हिस्सा बनाया जाएगा।