भोजपुर के शाहपुर क्षेत्र से जुड़े भरत तिवारी मामले में बिहार पुलिस ने अपनी ही कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद कड़ा कदम उठाया है। विभागीय स्तर पर की गई शुरुआती समीक्षा के बाद पांच पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इनमें एक थानाध्यक्ष, दो उपनिरीक्षक, एक एएसआई और एक सिपाही शामिल हैं।
मुख्यालय ने कहा ये
पुलिस मुख्यालय का मानना है कि घटना से पहले और दौरान की गई कार्रवाई में कुछ स्तर पर गंभीर चूक हुई हो सकती है। इसी वजह से संबंधित कर्मियों को जांच पूरी होने तक ड्यूटी से अलग कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, संबंधित टीम को पहले भी अभियुक्त के खिलाफ कार्रवाई का मौका मिला था, लेकिन उस दौरान अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके। अब इसी पहलू को जांच का प्रमुख बिंदु बनाया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर किन परिस्थितियों में कार्रवाई प्रभावी नहीं हो सकी और क्या निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया था।
अफसरों को सौंपी गई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने जांच की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी है। साथ ही तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों की मदद से पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। विभाग का कहना है कि जांच केवल घटना तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उससे पहले हुई पुलिस कार्रवाई और निर्णय प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाएगी।
इस बीच राज्य सरकार ने भी मामले को संवेदनशील मानते हुए न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि प्रशासन किसी भी तरह के विवाद या संदेह को पूरी तरह दूर करना चाहता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वर्दी में होने का मतलब जवाबदेही से छूट नहीं है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही, नियमों की अनदेखी या कर्तव्य निर्वहन में कमी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पूरे मामले पर पुलिस मुख्यालय की नजर बनी हुई है और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।