मुहर्रम के जुलूस को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य की पहल इस बार चर्चा का विषय बन गई। परंपरागत सुरक्षा व्यवस्था के साथ उन्होंने निगरानी का एक नया तरीका अपनाया, जिसने पूरे जुलूस को करीब से कैमरों की नजर में रखा। इस अनोखे प्रयोग के तहत जिले के सभी थानों को पांच-पांच वाई-फाई युक्त सीसीटीवी कैमरे उपलब्ध कराए गए।
ऊंचे डंडों पर भी लगाए गए कैमरे
इनमें से एक-दो कैमरों को पुलिस वाहनों पर ऊंचे डंडों के सहारे लगाया गया, जबकि बाकी कैमरों को 10 से 12 फीट लंबी लाठियों पर बांधकर पुलिसकर्मियों को जुलूस के बीच चलने की जिम्मेदारी दी गई। इससे भीड़ के बीच होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखना आसान हो गया। यदि कोई उपद्रवी माहौल बिगाड़ने की कोशिश करता तो उसकी हरकत तुरंत कैमरे में रिकॉर्ड हो सकती थी।
इन कैमरों की खासियत यह रही कि इनमें सोलर पैनल लगे थे, जिससे लंबे समय तक बिजली की जरूरत नहीं पड़ी। साथ ही मेमोरी कार्ड के जरिए कई घंटों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित होती रही। पुलिस का मानना है कि इस तकनीक ने निगरानी को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बनाया।
एसएसपी ने बताया ये
एसएसपी अनुराग आर्य के निर्देश पर पूरे जिले में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम भी किए गए। 530 दारोगा, 760 हेड कांस्टेबल, 1500 कांस्टेबल और 200 होमगार्ड तैनात रहे। इसके अलावा तीन कंपनी पीएसी, 18 क्विक रिस्पांस टीम (QRT), छह ड्रोन टीम और 94 पीआरवी वाहन लगातार गश्त करते रहे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एसएसपी की इस नई पहल का सकारात्मक असर देखने को मिला। पूरे आयोजन के दौरान कहीं भी कोई बड़ा बवाल नहीं हुआ और जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक पुलिस व्यवस्था के इस बेहतर तालमेल को अब भविष्य के बड़े आयोजनों के लिए भी एक प्रभावी मॉडल माना जा रहा है।