उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में रिश्वतखोरी की एक और घटना उजागर होते ही डीजीपी राजीव कृष्ण ने कड़ा रुख अपनाया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में पुलिसकर्मी वाहन चालकों से अवैध वसूली करते नजर आए, जिसके बाद मुख्यालय स्तर से त्वरित जांच के आदेश दिए गए। रिपोर्ट आने पर चित्रकूट, बांदा और कौशांबी जिलों में एक साथ 11 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया, जिनमें पांच थानाध्यक्ष भी शामिल हैं।
जांच होगी सुनिश्चित
डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि पुलिस की साख और जनता का भरोसा किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होना चाहिए। विभाग में अनुशासन और ईमानदारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी यदि जनता से धन वसूली या दुर्व्यवहार में शामिल पाया जाता है, तो तत्काल निलंबन और जांच सुनिश्चित की जाए।
तीन जिलों में कार्रवाई का पूरा ब्यौरा
चित्रकूट जिले में सबसे ज्यादा छह पुलिसकर्मी एक साथ निलंबित हुए हैं, जिनमें भरतकूप, पहाड़ी और राजापुर थानों के प्रभारी निरीक्षक भी शामिल हैं। बांदा में बदौसा थानाध्यक्ष और एक आरक्षी पर कार्रवाई हुई है, जबकि कौशांबी जिले के महेवाघाट थानाध्यक्ष और एक सिपाही को भी निलंबन झेलना पड़ा है।
सभी के खिलाफ रिश्वत लेने और वाहन चालकों को अनुचित रूप से पास कराने के आरोप हैं। यह कार्रवाई उस वीडियो के सामने आने के बाद हुई है, जिसे समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया था। वीडियो में वर्दीधारी पुलिसकर्मी खुलेआम पैसे लेते दिखाई दे रहे थे। मामला तूल पकड़ते ही डीजीपी ने तत्काल संज्ञान लिया और रिपोर्ट मांगी।
विभाग में मचा हड़कंप, संदेश साफ
इस सामूहिक कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। संदेश साफ है—ईमानदारी से काम करें या निलंबन झेलें। डीजीपी ने दोहराया कि यूपी पुलिस जनता की सेवा के लिए है, न कि कमाई का जरिया बनने के लिए।